Wednesday, February 11

तुर्की से ड्रोन और हमलावर हेलीकॉप्टर खरीदेगा बांग्लादेश एर्दोगन की ‘इस्लामिक कूटनीति’ से भारत के चारों ओर बन रहा नया सुरक्षा घेरा?

 

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तुर्की और बांग्लादेश के बीच रक्षा सहयोग तेज़ी से गहराता जा रहा है। ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक, बांग्लादेश वायुसेना तुर्की से ANKA सीरीज के ड्रोन और T129 ATAK हमलावर हेलीकॉप्टर खरीदने की दिशा में गंभीर बातचीत कर रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब तुर्की राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन इस्लामिक देशों के साथ सैन्य और रणनीतिक संबंधों को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।

 

सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश एयर चीफ मार्शल हसन महमूद खान से ढाका में तुर्की एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (TAI) के शीर्ष अधिकारियों ने मुलाकात की। इस बैठक में ड्रोन और हमलावर हेलीकॉप्टर सौदे से जुड़े तकनीकी और रणनीतिक पहलुओं पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि बांग्लादेश आठ T129 ATAK हेलीकॉप्टर खरीद सकता है।

 

पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश

 

गौरतलब है कि तुर्की पहले ही पाकिस्तान को ड्रोन और सैन्य सहायता दे चुका है। इसके अलावा मालदीव को Bayraktar TB-2 ड्रोन सौंपे जा चुके हैं। अब बांग्लादेश के साथ बढ़ता रक्षा सहयोग इस ओर इशारा करता है कि तुर्की दक्षिण एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी और प्रभाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति एर्दोगन खुद को इस्लामिक देशों के एक प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित करना चाहते हैं और इसी कड़ी में भारत के पड़ोसी मुस्लिम देशों के साथ रक्षा समझौतों को बढ़ावा दे रहे हैं।

 

ANKA ड्रोन की ताकत

 

ANKA ड्रोन तुर्की द्वारा विकसित मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (MALE) श्रेणी का मानव रहित विमान है।

 

करीब 24 घंटे तक हवा में उड़ान की क्षमता

निगरानी, जासूसी और हमले में सक्षम

सैटेलाइट कम्युनिकेशन और एडवांस्ड रडार से लैस

ज़मीनी और नौसैनिक अभियानों में उपयोगी

 

सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इन ड्रोन की तैनाती से बांग्लादेश को पूर्वोत्तर भारत पर निगरानी की अतिरिक्त क्षमता मिल सकती है।

 

ATAK हेलीकॉप्टर की विशेषताएं

 

T129 ATAK एक आधुनिक हमलावर हेलीकॉप्टर है, जिसे गर्म और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के लिए डिजाइन किया गया है।

 

स्टील्थ तकनीक से लैस

नाइट विजन और हेलमेट-माउंटेड डिस्प्ले

लेज़र रेंजफाइंडर और एडवांस हथियार प्रणाली

जासूसी, हमला और रेस्क्यू मिशन में सक्षम

 

भारत की सुरक्षा पर असर?

 

तुर्की-बांग्लादेश रक्षा सौदे को लेकर रणनीतिक हलकों में चिंता जताई जा रही है। जानकारों का कहना है कि अगर यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो यह भारत के लिए सुरक्षा और कूटनीतिक स्तर पर नई चुनौती खड़ी कर सकता है।

 

दक्षिण एशिया में बदलते सैन्य समीकरणों के बीच तुर्की की सक्रियता यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या एर्दोगन की इस्लामिक कूटनीति भारत को रणनीतिक रूप से घेरने की कोशिश है, या यह सिर्फ तुर्की के बढ़ते रक्षा निर्यात की एक कड़ी भर है।

 

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