
पटना: बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति के मौके पर तेज प्रताप यादव के आवास पर आयोजित दही-चूड़ा भोज केवल स्वाद का संगम नहीं, बल्कि शक्ति प्रदर्शन और राजनीतिक समीकरणों का केंद्र बना। इस भव्य आयोजन में राजद सुप्रीमो लालू यादव और उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा जैसे एनडीए के दिग्गज शामिल हुए, लेकिन चिराग पासवान और उनकी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) पूरी तरह नदारद रहे।
भोज के दौरान तेज प्रताप ने चिराग को फोन किया, लेकिन चिराग ने कॉल रिसीव नहीं किया। मीडिया से बात करते हुए चिराग ने इसे अत्यधिक व्यस्तता का परिणाम बताया और स्पष्ट किया कि किसी पुरानी कड़वाहट या राजनीतिक कारण से ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने तेज प्रताप यादव को अपना ‘छोटा भाई’ बताया और उन्हें मकर संक्रांति की शुभकामनाएं भी दी।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह रही कि भोज में तेज प्रताप के छोटे भाई तेजस्वी यादव की गैरहाजिरी पर भी चिराग ने कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा, “यह एक पारिवारिक विषय है, और इसे राजनीतिक दृष्टि से नहीं देखना चाहिए। जब घर के मुखिया लालू प्रसाद यादव स्वयं वहां मौजूद हैं, तो बाकी की उपस्थिति या अनुपस्थिति पर बहस की जरूरत नहीं।”
दिलचस्प यह भी रहा कि भोज में बीजेपी और जदयू के कद्दावर नेता, जीतन राम मांझी की ‘हम’ और उपेंद्र कुशवाहा की ‘आरएलएम’ पार्टी के नेता मौजूद थे, जबकि चिराग की पार्टी के किसी पदाधिकारी को न्योता नहीं मिला। इस वजह से राजनीतिक गलियारों में नए कयास और सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं।