
देशभर में 40.7 करोड़ में से लगभग 70 प्रतिशत वाहन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इनमें अधिकतर टू-व्हीलर शामिल हैं, जिनके पास पीयूसी, फिटनेस सर्टिफिकेट या इंश्योरेंस जैसे आवश्यक दस्तावेज़ पूरी तरह मौजूद नहीं हैं। इस स्थिति के कारण केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को एक नया सिस्टम बनाने का प्रस्ताव दिया है, जिससे समय पर आवश्यक कागजात पूरा न होने पर धीरे-धीरे इन वाहनों के रजिस्ट्रेशन को डी-रजिस्टर किया जा सके। इस योजना से करीब 17 करोड़ वाहनों के रजिस्ट्रेशन रद्द होने का खतरा है।
सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, फिलहाल केवल 8.2 करोड़ वाहन ही पूरी तरह से नियमों के अनुरूप हैं। बाकी 30 करोड़ से अधिक वाहनों में किसी न किसी प्रकार की कमी पाई गई है। इसके अतिरिक्त, 2.2 करोड़ वाहन पुराने रिकॉर्ड (आर्काइव्ड) में हैं।
मंत्रालय ने वाहनों को चार कैटेगरी में बांटा है:
- एक्टिव–कंप्लायंट – सभी दस्तावेज़ पूरी तरह ठीक।
- एक्टिव नॉन–कंप्लायंट – कुछ दस्तावेज़ अमान्य या अधूरे।
- टेंपरेरी आर्काइव्ड – लंबे समय से नियमों का पालन न करने वाले वाहन।
- परमानेंट आर्काइव्ड – कबाड़, रजिस्ट्रेशन कैंसिल या सरेंडर किए गए वाहन।
बड़े राज्यों में तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और बिहार में 40 प्रतिशत से अधिक वाहनों के कागजात अधूरे हैं। केवल तेलंगाना ऐसा राज्य है, जहां यह आंकड़ा 20 प्रतिशत से कम है।
प्रस्तावित नियम:
- एक्टिव नॉन-कंप्लायंट वाहनों के मालिकों को एक साल के अंदर फिटनेस, पीयूसी और इंश्योरेंस रिन्यू कराना होगा।
- यदि दो साल तक आवश्यक दस्तावेज़ न हों, तो वाहन परमानेंट आर्काइव्ड कैटेगरी में चला जाएगा।
- गाड़ी को वापस एक्टिव करने के लिए केवल डेटा में त्रुटि, कोर्ट का आदेश या अन्य विशेष कारण होने पर ट्रांसपोर्ट कमिश्नर की मंजूरी आवश्यक होगी।
मंत्रालय का उद्देश्य वाहनों के डेटाबेस को साफ़ करना और सही आंकड़े सुनिश्चित करना है, ताकि सड़क सुरक्षा और कानूनी अनुपालन बेहतर हो सके। सभी रिकवरी और रिन्यूअल की जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज की जाएगी, जिसे ऑडिट और रिपोर्टिंग के लिए उपयोग किया जाएगा।
