Thursday, January 15

यूपी को मिलेगी सस्ती बिजली, मिर्जापुर में अदाणी ग्रुप लगाएगा 1500 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट

 

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उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। मिर्जापुर में प्रस्तावित 1500 मेगावाट क्षमता के थर्मल एनर्जी पावर प्लांट से प्रदेश को सस्ती बिजली मिलने की संभावना और मजबूत हो गई है। यह पावर प्लांट अदाणी ग्रुप द्वारा लगाया जा रहा है, जिससे वर्ष 2031 तक उत्तर प्रदेश को बिजली की आपूर्ति शुरू हो जाएगी।

 

राज्य विद्युत नियामक आयोग ने मिर्जापुर थर्मल एनर्जी पावर प्रोजेक्ट के पावर सप्लाई एग्रीमेंट (पीएसए) को मंजूरी देते हुए बिडिंग रूट के तहत तय की गई 5.38 रुपये प्रति यूनिट की दर को स्वीकार कर लिया है। हाल ही में राज्य कैबिनेट भी इस परियोजना को हरी झंडी दे चुकी है।

 

एफजीडी संयंत्र नहीं लगाने से घटेगी लागत

 

पावर प्लांट में फ्लू गैस डी-सल्फराइजेशन (एफजीडी) संयंत्र नहीं लगाए जाने के आदेश के बाद परियोजना की लागत में बड़ी कमी आने की संभावना जताई जा रही है। डेवलपर के अनुसार, एफजीडी संयंत्र न लगाने से लगभग 270 करोड़ रुपये की सीधी बचत होगी। इससे प्लांट की फिक्स्ड और वैरिएबल लागत घटेगी, जिसका सीधा लाभ बिजली उपभोक्ताओं को सस्ती दरों के रूप में मिलेगा।

 

हर तीन महीने में होगा लागत का आकलन

 

राज्य विद्युत नियामक आयोग ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन को निर्देश दिए हैं कि परियोजना की वास्तविक लागत का हर तीन महीने में आकलन किया जाए, ताकि लागत में होने वाली किसी भी कमी का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सके।

 

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग के फैसले के बाद नियामक आयोग के चेयरमैन से मुलाकात कर इस संबंध में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एफजीडी संयंत्र न लगाने के चलते परियोजना लागत में कमी 270 करोड़ रुपये से कहीं अधिक हो सकती है।

 

2000 करोड़ रुपये तक लाभ का दावा

 

अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि राज्यसभा में ऊर्जा राज्यमंत्री द्वारा दिए गए जवाब के अनुसार एफजीडी संयंत्र की लागत 85 लाख रुपये प्रति मेगावाट से लेकर 1.2 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट तक होती है। इसी आधार पर परिषद का अनुमान है कि एफजीडी संयंत्र न लगने से डेवलपर को करीब 2000 करोड़ रुपये तक का लाभ हो सकता है। इसके अलावा, जीएसटी दरों में बदलाव से भी परियोजना लागत में और कमी आने की संभावना है।

 

यह परियोजना न केवल प्रदेश की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करेगी, बल्कि औद्योगिक विकास को गति देने के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं को सस्ती और स्थिर बिजली उपलब्ध कराने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

 

 

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