
बहुचर्चित कपसाड़ अपहरण और हत्याकांड में एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है। दलित युवती रूबी के अपहरण और उसकी मां सुनीता की निर्मम हत्या के आरोपी पारस सोम को लेकर उसके परिजनों और वकीलों के पैनल ने बड़ा दावा किया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि पारस सोम घटना के समय नाबालिग था और ऐसे में उसके खिलाफ चल रही न्यायिक प्रक्रिया सामान्य अदालत के बजाय जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) के दायरे में आनी चाहिए।
पारस सोम की गिरफ्तारी के बाद से ही उसकी उम्र को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब इस दावे को मजबूती देने के लिए तीन वरिष्ठ अधिवक्ताओं का पैनल अदालत के सामने आया है। इस पैनल में एडवोकेट बलराम सोम, एडवोकेट संजीव राणा और एडवोकेट विजय शर्मा शामिल हैं, जिन्होंने इस संबंध में औपचारिक याचिका दाखिल की है।
हाईस्कूल की मार्कशीट सहित दस्तावेज पेश
अधिवक्ताओं के अनुसार, उनके पास ऐसे शैक्षिक दस्तावेज मौजूद हैं जो पारस सोम को नाबालिग साबित करते हैं। याचिका के साथ वर्ष 2024 की हाईस्कूल परीक्षा की मार्कशीट संलग्न की गई है, जिसमें पारस की जन्मतिथि 11 मई 2008 दर्ज है। इस आधार पर घटना के समय उसकी उम्र करीब 17 वर्ष 7 माह बताई जा रही है। इसके अलावा वर्ष 2022 में जनता आदर्श इंटर कॉलेज का प्रवेश पत्र भी प्रस्तुत किया गया है, जिस पर कॉलेज प्रशासन द्वारा फोटो प्रमाणित है।
वकीलों का कहना है कि कानून स्पष्ट है—यदि आरोपी घटना के समय 18 वर्ष से कम आयु का हो, तो उसकी सुनवाई अनिवार्य रूप से जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में की जानी चाहिए। इसी आधार पर मामले को ट्रांसफर किए जाने की मांग की गई है।
पुलिस की कहानी पर भी उठाए सवाल
अधिवक्ता पैनल ने पुलिस की जांच और आरोपों पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि घटनाक्रम जबरन अपहरण की थ्योरी से मेल नहीं खाता। वकीलों ने तर्क दिया कि रेलवे स्टेशन जैसी सार्वजनिक जगह से अपहरण की कहानी संदेह के घेरे में है। साथ ही यह दावा भी किया गया कि युवती कथित रूप से अपनी सहमति से आरोपी के साथ गई थी, जिस पर अदालत को निष्पक्ष रूप से विचार करना चाहिए।
एससी-एसटी विशेष अदालत में दाखिल हुई याचिका
बुधवार को आरोपी के अधिवक्ताओं का पैनल सभी दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ एससी-एसटी विशेष न्यायालय पहुंचा, जहां याचिका दाखिल की गई। दावा किया जा रहा है कि अदालत ने याचिका स्वीकार कर ली है और शीघ्र ही इस पर सुनवाई की तिथि तय की जाएगी। अधिवक्ताओं ने यह भी बताया कि वे जल्द ही जेल जाकर पारस सोम से मुलाकात करेंगे और आगे की कानूनी रणनीति तय करेंगे।
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि मेरठ के कपसाड़ गांव में पारस सोम पर गांव की दलित युवती रूबी के अपहरण और उसकी मां सुनीता की हत्या का आरोप है। पुलिस के अनुसार, अपहरण का विरोध करने पर सुनीता पर धारदार हथियार से हमला किया गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। तीन दिन की तलाश के बाद पुलिस ने 10 जनवरी को पारस सोम को गिरफ्तार कर रूबी को सकुशल बरामद किया था। फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है, जबकि रूबी को उसके परिजनों के सुपुर्द किया जा चुका है।