Wednesday, January 14

ट्रंप का टैरिफ बेअसर! चीन ने बनाया निर्यात का नया रिकॉर्ड, ट्रेड सरप्लस पहली बार 1 ट्रिलियन डॉलर के पार

नई दिल्ली।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ भी चीन की आर्थिक रफ्तार को रोक नहीं सके। वैश्विक व्यापार के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में चीन का ट्रेड सरप्लस पहली बार 1 ट्रिलियन डॉलर के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया। यह आंकड़ा न सिर्फ अमेरिका की टैरिफ नीति पर सवाल खड़े करता है, बल्कि चीन की बदलती व्यापार रणनीति की ताकत भी दिखाता है।

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बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में चीन का ट्रेड सरप्लस करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर रहा, जो 2024 के मुकाबले लगभग 20 प्रतिशत अधिक है। इससे पहले 2024 में यह आंकड़ा 992 अरब डॉलर था।

अमेरिका को झटका, बाकी दुनिया बनी सहारा

टैरिफ के चलते जहां अमेरिका को चीन का निर्यात 20 प्रतिशत तक गिर गया, वहीं चीन ने तेजी से नए बाजारों की ओर रुख कर इस नुकसान की भरपाई कर ली। अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया, लैटिन अमेरिका और यूरोप जैसे क्षेत्रों में चीनी निर्यात में जबरदस्त उछाल देखने को मिला।

  • अफ्रीका को निर्यात: 26% की वृद्धि
  • दक्षिण पूर्व एशिया: 13% की बढ़ोतरी
  • यूरोपीय संघ: 8% इजाफा
  • लैटिन अमेरिका: 7% वृद्धि

निर्यात में मजबूती, आयात स्थिर

2025 में चीन का कुल निर्यात 5.5 प्रतिशत बढ़कर 3.77 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया, जबकि आयात 2.58 ट्रिलियन डॉलर पर लगभग स्थिर रहा। केवल दिसंबर 2025 में ही निर्यात में 6.6 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो अर्थशास्त्रियों के अनुमानों से बेहतर रही। इसी अवधि में आयात भी 5.7 प्रतिशत बढ़ा।

टेक्नोलॉजी और ऑटो सेक्टर बने ताकत

विशेषज्ञों के अनुसार, कंप्यूटर चिप्स, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और ऑटोमोबाइल्स की मजबूत वैश्विक मांग ने चीन के निर्यात को नई ऊंचाई दी। चीन ने हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और वैकल्पिक बाजारों पर फोकस कर अमेरिका पर निर्भरता कम कर ली।

आगे भी जारी रह सकती है बढ़त

आर्थिक जानकारों का मानना है कि वर्ष 2026 में भी चीन के निर्यात में करीब 3 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है। मौजूदा आंकड़े यह साफ संकेत देते हैं कि टैरिफ के दबाव के बावजूद चीन ने वैश्विक व्यापार में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है।

कुल मिलाकर, यह उपलब्धि न केवल ट्रंप की टैरिफ नीति की सीमाएं उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि चीन ने वैश्विक बाजारों में खुद को कितनी कुशलता से ढाल लिया है।

 

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