
उमरिया (मध्य प्रदेश): जिले के मानपुर तहसील में भरण-पोषण के एक मामले में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उच्च न्यायालय ने कड़ी नाराजगी जताई है। मामला ग्राम चंदवार की अनीता लोनी का है, जिसे अपने पति राजमन लोनी से भरण-पोषण के लिए पैसे नहीं मिले।
कोर्ट ने दिए थे कुर्की के आदेश
साल 2015 में पति से हुए विवाद के बाद अनीता अपने मायके मैहर जिले के रोहनिया गांव में रहने लगी। कोर्ट ने राजमन को हर महीने 3,000 रुपये भरण-पोषण देने का आदेश दिया था, लेकिन उन्होंने एक भी पैसा नहीं दिया। इसके बाद कोर्ट ने राजमन की चल-अचल संपत्ति कुर्क करने का निर्देश दिया।
भाईयों की संपत्ति जब्त, प्रशासन पर फटकार
राजमन के नाम कोई संपत्ति न होने पर प्रशासन ने उसके भाईयों की संपत्ति जब्त कर सरपंच को सौंप दी। यह कदम कोर्ट ने न्यायोचित नहीं माना। हाईकोर्ट ने कलेक्टर उमरिया और तहसीलदार मानपुर को फटकार लगाते हुए 23 जनवरी 2026 को खुद पेश होने का अंतिम आदेश जारी किया।
अब प्रशासन को करना होगा जवाबदेह
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली बार यदि कलेक्टर और तहसीलदार उपस्थित नहीं हुए तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई या वारंट जारी किया जा सकता है। इस मामले ने प्रशासनिक जिम्मेदारी और न्यायिक आदेशों के पालन की आवश्यकता पर सवाल खड़ा किया है।