
नई दिल्ली: भारत से चावल का निर्यात पिछले साल 19.4% बढ़कर रेकॉर्ड के करीब पहुंच गया है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है और भारतीय चावल की बढ़ती सप्लाई ने एशिया में चावल की कीमतें पिछले लगभग दस साल के सबसे निचले स्तर पर ला दी हैं। इससे गरीब देशों को राहत मिली है, क्योंकि उनके लिए चावल खरीदना अब सस्ता और आसान हो गया है।
सरकारी और इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार, भारत ने मार्च में चावल के निर्यात पर लगी सारी पाबंदियां हटा दी थीं। इसके बाद भारतीय चावल अंतरराष्ट्रीय बाजार में सस्ता और प्रतिस्पर्धी बन गया। इस फैसले के चलते थाईलैंड और वियतनाम जैसे अन्य निर्यातक देशों की बिक्री में गिरावट आई।
2024 में भारत का चावल निर्यात 21.55 मिलियन मीट्रिक टन तक बढ़ गया, जबकि 2023 में यह 18.05 मिलियन टन था। साल 2022 में भारत ने रिकॉर्ड 22.3 मिलियन टन चावल निर्यात किया था।
विशेष रूप से, गैर-बासमती चावल का निर्यात 25% बढ़कर 15.15 मिलियन टन तक पहुंच गया, जबकि बासमती चावल का निर्यात 8% बढ़कर रिकॉर्ड 6.4 मिलियन टन हो गया। गैर-बासमती चावल की सबसे बड़ी शिपमेंट बांग्लादेश, बेनिन, कैमरून, आइवरी कोस्ट और जिबूती जैसे देशों में हुई। वहीं, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और ब्रिटेन ने प्रीमियम बासमती चावल की खरीद बढ़ाई।
ओलम एग्री इंडिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट नितिन गुप्ता ने इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में कहा कि भारतीय चावल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अन्य निर्यातक देशों की तुलना में बेहद प्रतिस्पर्धी है। कम कीमतों की वजह से भारत ने अपना खोया हुआ बाजार हिस्सा वापस पा लिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जितना चावल निर्यात करता है, वह दुनिया के अगले तीन सबसे बड़े निर्यातक देशों — थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान — के संयुक्त निर्यात से भी अधिक है। इस बढ़ती सप्लाई से वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति और मजबूत हुई है।