
नई दिल्ली।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान की सैन्य और रणनीतिक नींव को हिला कर रख दिया। इस ऑपरेशन में मिली नाकामी के बाद पड़ोसी देश को न सिर्फ अपने सैन्य ढांचे में बड़े बदलाव करने पड़े, बल्कि संवैधानिक संशोधनों तक का सहारा लेना पड़ा। इस बात का खुलासा खुद भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने किया है।
पुणे में आयोजित पुणे पब्लिक पॉलिसी फेस्टिवल 2026 के दौरान बोलते हुए CDS जनरल चौहान ने साफ शब्दों में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान द्वारा उठाए गए कदम इस बात का अप्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि यह सैन्य कार्रवाई इस्लामाबाद के पक्ष में नहीं गई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की जल्दबाजी में किए गए संवैधानिक और सैन्य सुधार उसकी रणनीतिक विफलता को उजागर करते हैं।
पाकिस्तान की सैन्य संरचना में बड़ा उलटफेर
जनरल चौहान ने बताया कि ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान ने अपने उच्च रक्षा संगठन का पुनर्गठन किया।
- ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन का पद समाप्त कर दिया गया।
- उसकी जगह चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज का नया पद बनाया गया।
- इसके साथ ही नेशनल स्ट्रैटेजी कमांड और आर्मी रॉकेट फोर्सेज कमांड की स्थापना की गई।
CDS ने कहा कि इन बदलावों से जमीन, संयुक्त और रणनीतिक सैन्य शक्तियों का केंद्रीकरण एक ही व्यक्ति के हाथ में हो गया है, जो सैन्य सिद्धांतों के विपरीत है और पाकिस्तान की भूमि-केंद्रित मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा केंद्रीकरण भविष्य में पाकिस्तान के सैन्य तंत्र के लिए आंतरिक चुनौतियां पैदा कर सकता है।
भारत की कमांड संरचना पर क्या पड़ा असर
इस सवाल पर कि क्या ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की कमांड व्यवस्था को बदलने के लिए प्रेरित किया, CDS ने स्पष्ट किया कि वे तीनों सेवा प्रमुखों पर सीधे कमांड नहीं करते, लेकिन परिचालन समन्वय उनकी जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी के स्थायी अध्यक्ष के रूप में सभी फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं, जिससे एकीकृत योजना और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है।
CDS ने यह भी बताया कि वे अंतरिक्ष, साइबर, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और कॉग्निटिव वारफेयर जैसे उभरते युद्ध क्षेत्रों की प्रत्यक्ष निगरानी करते हैं, साथ ही इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के तहत स्पेशल फोर्सेज की भी देखरेख करते हैं।
युद्ध की रणनीति में वैश्विक बदलाव
जनरल चौहान ने कहा कि दुनिया भर में सैन्य रणनीति तेजी से बदल रही है।
उन्होंने कहा, “पहले युद्ध की दिशा भूगोल तय करता था—पानीपत से लेकर प्लासी तक। अब तकनीक युद्ध का मुख्य चालक बन चुकी है।”
उन्होंने आगाह किया कि आने वाले समय में संपर्क रहित और गैर-घातक साधनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा।
डोकलाम, बालाकोट और गलवान से मिले सबक
CDS ने ऑपरेशन सिंदूर के साथ-साथ उरी सर्जिकल स्ट्राइक, डोकलाम, गलवान गतिरोध और बालाकोट एयर स्ट्राइक का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन सभी अभियानों से उच्च रक्षा संगठनों को लेकर महत्वपूर्ण सबक मिले हैं।
ये ऑपरेशन इनोवेटिव और परिस्थितियों के अनुरूप कमांड व्यवस्था के जरिए अंजाम दिए गए।
उन्होंने भरोसा जताया कि ज्वाइंट थिएटर कमांड की स्थापना के लिए ज्यादातर जमीनी काम पूरा हो चुका है और इंटीग्रेटेड कमांड स्ट्रक्चर तय समय से पहले लागू कर दिया जाएगा।
कुल मिलाकर, CDS जनरल अनिल चौहान के बयान से साफ है कि ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि इसने पाकिस्तान को रणनीतिक, सैन्य और संवैधानिक स्तर पर बैकफुट पर ला खड़ा किया, जबकि भारत अपनी रक्षा तैयारियों को और अधिक संगठित व आधुनिक बना रहा है।