
नई दिल्ली।
सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाली एक गंभीर बीमारी है, लेकिन अच्छी बात यह है कि यह सबसे आसानी से रोके जा सकने वाले कैंसरों में शामिल है। इसके बावजूद जागरूकता की कमी, गलतफहमियों और समय पर जांच न कराने के कारण आज भी बड़ी संख्या में महिलाएं इस खतरे की चपेट में आ जाती हैं। गुरुग्राम स्थित सीके बिरला हॉस्पिटल की ऑब्सटेट्रिक्स एंड गाइनेकोलॉजी विभाग की डायरेक्टर डॉ. अंजलि कुमार का कहना है कि भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर के गाइनेकोलॉजिस्ट चाहते हैं कि महिलाएं सर्वाइकल कैंसर से जुड़ी कुछ अहम बातों को गंभीरता से समझें, क्योंकि यह केवल बीमारी नहीं, बल्कि उनकी पूरी जिंदगी से जुड़ा मुद्दा है।
केवल बुजुर्ग महिलाओं की बीमारी नहीं
डॉ. अंजलि कुमार के अनुसार, यह एक बड़ी गलतफहमी है कि सर्वाइकल कैंसर केवल उम्रदराज महिलाओं को होता है। वास्तव में, इस कैंसर से जुड़े प्री-कैंसरस बदलाव कई साल पहले ही शरीर में शुरू हो जाते हैं। यही कारण है कि डॉक्टर 21 वर्ष की उम्र से ही नियमित सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग कराने की सलाह देते हैं। समय रहते जांच शुरू करने से बीमारी को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सकता है और इलाज आसान हो जाता है।
HPV वैक्सीन की अहम भूमिका
सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा कारण ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) है। इसी वजह से HPV वैक्सीन को इस कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी हथियार माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यौन सक्रियता शुरू होने से पहले वैक्सीन लगवाने पर सबसे अधिक सुरक्षा मिलती है। हालांकि 20 से 30 वर्ष की उम्र में भी महिलाओं और पुरुषों को इसका लाभ हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि वैक्सीन लगवाने के बाद भी नियमित स्क्रीनिंग जरूरी रहती है, लेकिन इससे खतरनाक HPV टाइप्स का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।
लक्षणों के इंतजार में न रहें
गाइनेकोलॉजिस्ट महिलाओं को यह भी चेतावनी देती हैं कि सर्वाइकल कैंसर के लक्षण दिखने का इंतजार करना खतरनाक हो सकता है। इस बीमारी की शुरुआती अवस्था में दर्द या किसी तरह की स्पष्ट परेशानी बहुत कम देखने को मिलती है। अनियमित ब्लीडिंग, पेल्विक पेन जैसे लक्षण अक्सर तब सामने आते हैं, जब बीमारी गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में अब कम खर्च वाले HPV टेस्ट और सेल्फ-सैंपलिंग किट भी उपलब्ध हैं, जिससे जांच और आसान हो गई है।
लाइफस्टाइल और यौन स्वास्थ्य भी जिम्मेदार
हालांकि सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण HPV है, लेकिन कुछ लाइफस्टाइल और यौन स्वास्थ्य से जुड़े कारक भी इसके खतरे को बढ़ाते हैं।
– धूम्रपान करने से HPV के कैंसर में बदलने की आशंका बढ़ जाती है।
– बार-बार गर्भधारण और कुछ हार्मोनल गर्भनिरोधकों का लंबे समय तक इस्तेमाल जोखिम को बढ़ा सकता है।
– अत्यधिक तनाव, पुरानी बीमारियां या एचआईवी जैसी स्थितियां इम्यूनिटी को कमजोर कर देती हैं, जिससे शरीर की बीमारी से लड़ने की क्षमता घट जाती है।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर वैक्सीनेशन, नियमित स्क्रीनिंग और सही जानकारी के जरिए सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है। महिलाओं को चाहिए कि वे झिझक और लापरवाही छोड़कर अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें, क्योंकि जागरूकता ही इस जानलेवा बीमारी से बचाव का सबसे मजबूत आधार है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी विशेषज्ञों द्वारा साझा की गई बातों और ऑनलाइन स्रोतों पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है।
