Monday, June 15

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पाकिस्तान नहीं खरीदेगा J-35 स्टील्थ जेट मुस्लिम देशों में चीनी लड़ाकू विमानों की बढ़ती मांग, पेंटागन का खुलासा

 

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चीन के उभरते सैन्य सामर्थ्य को लेकर अमेरिका की चिंता एक बार फिर पेंटागन की ताजा रिपोर्ट में सामने आई है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कांग्रेस को सौंपी अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि चीन अपने उन्नत लड़ाकू विमानों के निर्यात की तैयारी में है, लेकिन इसके साथ ही एक चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि पाकिस्तान, चीनी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट J-35 का संभावित ग्राहक नहीं है।

 

पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार, चीन कम से कम तीन लड़ाकू विमानों—J-35, चौथी पीढ़ी के J-10C और JF-17—को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने की योजना बना रहा है। इनमें से JF-17 को पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर विकसित किया है, जबकि J-10C फिलहाल केवल पाकिस्तान की वायुसेना के पास है।

 

मुस्लिम देशों में चीनी जेट्स को लेकर उत्साह

 

रिपोर्ट में बताया गया है कि हालांकि मई 2025 तक J-35 की कोई औपचारिक बिक्री नहीं हुई है, लेकिन कई देश इसे खरीदने में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इनमें मिस्र, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) प्रमुख हैं। पेंटागन का मानना है कि पश्चिमी देशों से हथियार खरीदने में राजनीतिक शर्तों और प्रतिबंधों के चलते कई इस्लामिक देश अब चीन की ओर रुख कर रहे हैं।

 

#पाकिस्तान के दावों पर सवाल

 

यह खुलासा पाकिस्तान के उन दावों के बिल्कुल उलट है, जिनमें उसने कई बार कहा था कि वह जल्द ही चीन से J-35 स्टील्थ फाइटर जेट हासिल करेगा। खासतौर पर भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तानी मीडिया में बार-बार यह दावा किया गया था कि चीन जल्द पाकिस्तान को J-35 सौंपने वाला है। लेकिन पेंटागन की रिपोर्ट ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है।

 

चीन की बड़ी सैन्य तैयारी

 

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) वायुसेना और नौसेना के लिए बड़े स्तर पर आधुनिकीकरण कर रही है। चीन पहले ही पांचवीं पीढ़ी के दो लड़ाकू विमान—J-20 और J-35—तैयार कर चुका है और छठी पीढ़ी के फाइटर जेट पर काम करने का दावा भी कर रहा है। इसके अलावा J-36 और J-XDS जैसे स्टील्थ प्रोजेक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एयरक्राफ्ट J-15D और नए एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग सिस्टम भी चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता को दर्शाते हैं।

 

एयरक्राफ्ट कैरियर पर भी चीन की नजर

 

पेंटागन रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन 2035 तक 6 नए एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इसके बाद उसके पास कुल 9 एयरक्राफ्ट कैरियर हो सकते हैं, जिनमें से कुछ परमाणु ऊर्जा से संचालित हो सकते हैं। ऐसा होने पर चीनी नौसेना, इस मामले में अमेरिका की बराबरी के करीब पहुंच जाएगी, जिसके पास फिलहाल 11 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं।

 

J-10C और JF-17 का भविष्य

 

जहां तक J-10C की बात है, पाकिस्तान अब तक इसके 36 विमानों का ऑर्डर दे चुका है, जिनमें से 20 की डिलीवरी हो चुकी है। मिस्र, ईरान, इंडोनेशिया, उज्बेकिस्तान और बांग्लादेश ने भी इसमें रुचि दिखाई है, लेकिन इन सौदों का भविष्य क्षेत्रीय राजनीति और वैश्विक भू-राजनीतिक हालात पर निर्भर करेगा।

 

निष्कर्ष

 

कुल मिलाकर पेंटागन की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि चीनी लड़ाकू विमानों को लेकर दुनिया के कई देशों में रुचि बढ़ रही है। हालांकि पाकिस्तान का J-35 सौदे से बाहर होना एक अहम संकेत है, लेकिन आने वाले वर्षों में चीन वैश्विक हथियार बाजार में एक बड़े खिलाड़ी के रूप में उभर सकता है।

 

 

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