Friday, May 22

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प्रदूषण ने बदली लग्ज़री हाउसिंग की दिशा

शुद्ध हवा की तलाश में अमीर खरीदार, गोवा से कसौली तक बढ़ी मांग**

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नई दिल्ली। देश के बड़े महानगरों में बढ़ते प्रदूषण ने अब केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि लग्ज़री हाउसिंग मार्केट की दिशा भी बदल दी है। दिल्ली-एनसीआर सहित कई महानगरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के 700 के पार पहुंचने से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। इसके चलते संपन्न वर्ग अब शुद्ध हवा, कम भीड़-भाड़ और प्रकृति के करीब बसे इलाकों में घर खरीदने को प्राथमिकता दे रहा है।

इस बदलाव का सीधा असर भारत के महंगे प्रॉपर्टी बाजार पर दिख रहा है। गोवा, अलीबाग, कुन्नूर, कसौली और खोपोली जैसे शांत और प्रदूषण-मुक्त इलाकों में लग्ज़री विला और प्रीमियम प्लॉट्स की मांग तेज़ी से बढ़ी है।

वीकेंड होम नहीं, अब फुल-टाइम लाइफस्टाइल

कोरोना काल के बाद लोगों की जीवनशैली में आए बदलाव ने इस ट्रेंड को और मजबूती दी है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमीर खरीदार अब दूसरे घर सिर्फ छुट्टियों के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक रहने और वहीं से काम करने के उद्देश्य से खरीद रहे हैं।

इस्प्रावा ग्रुप के एमडी और को-सीईओ निभ्रांत शाह के अनुसार,
“यह बदलाव केवल ट्रेंड नहीं, बल्कि मापा जा सकने वाला सच है। हाइब्रिड वर्क कल्चर के चलते दूसरे घर अब लग्ज़री नहीं, बल्कि एक व्यवहारिक जीवनशैली बन चुके हैं। खरीदार अब हफ्तों और महीनों तक इन घरों में रह रहे हैं।”

युवाओं और मिलेनियल्स की बड़ी भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव में युवाओं और मिलेनियल्स की भूमिका अहम है। पहले जहां यह बाजार बिखरा हुआ था, अब यह ज्यादा संगठित और योजनाबद्ध हो गया है।
इस बढ़ती मांग का अंदाजा जमीन खरीद के आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है।

जेएलएल इंडिया के अनुसार, पिछले 18 महीनों में देश के 23 शहरों में 2300 एकड़ से अधिक जमीन खरीदी गई है, जिसमें से 38 प्रतिशत से ज्यादा जमीन प्लॉट और कम ऊंचाई वाले घरों के विकास के लिए है।

प्रदूषण से दूर आशियाने की चाह

‘द हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा’ के चेयरमैन अभिनंदन लोढ़ा बताते हैं कि खरीदार अब ऐसे दूसरे घर ढूंढ रहे हैं, जहां वे नवंबर से फरवरी जैसे प्रदूषण वाले महीनों में ज्यादा समय बिता सकें।
अब ये प्रॉपर्टीज सिर्फ कभी-कभार इस्तेमाल के लिए नहीं, बल्कि शहरों की भीड़ और जहरीली हवा से बचने का स्थायी समाधान बनती जा रही हैं।

हवा की क्वालिटी बनी सबसे बड़ा फैक्टर

लग्ज़री प्रॉपर्टी से जुड़े कंसल्टेंट्स का कहना है कि अब दूसरे घरों की मांग मौज-मस्ती से ज्यादा हवा की गुणवत्ता और उपयोगिता पर निर्भर करती है।
दक्षिण मुंबई के क्लाइंट्स के साथ काम करने वाले प्रॉपर्टी कंसल्टेंट विक्रम कपूर के अनुसार,
“सर्दियों में बड़े शहरों का AQI अक्सर ‘खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच जाता है। इसी कारण संपन्न खरीदार अब उन जगहों को चुन रहे हैं जहां हवा साफ और ट्रैफिक कम हो।”

डेवलपर्स भी बदल रहे रणनीति

इस मांग को देखते हुए बड़े रियल एस्टेट डेवलपर्स अब ऊंची इमारतों की जगह—

  • कम घनत्व वाले विला क्लस्टर
  • गेटेड प्लॉट डेवलपमेंट
  • मैनेज्ड विला कम्युनिटीज
    पर ध्यान दे रहे हैं।

खरीदार अब केवल प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ने पर नहीं, बल्कि लंबे समय तक रहने लायक, अच्छी मेंटेनेंस और व्यवस्थित विकास वाली प्रॉपर्टी को प्राथमिकता दे रहे हैं।

लग्ज़री हाउसिंग की नई परिभाषा

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में शुद्ध हवा, खुला वातावरण और बेहतर जीवन गुणवत्ता ही लग्ज़री हाउसिंग की असली पहचान होगी। प्रदूषण ने अमीरों की पसंद बदल दी है और यही बदलाव भारतीय प्रॉपर्टी बाजार की नई तस्वीर गढ़ रहा है।

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