
औरंगाबाद: बिहार में शराबबंदी लागू होने के नौ साल बाद भी शराब माफियाओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। औरंगाबाद जिले के हसपुरा थाना क्षेत्र के इटवा गांव में खुशबू निशा और उनके पति सलाम आलम अपने घर के दरवाजे पर शराब बिक्री का विरोध करने के कारण माफियाओं के निशाने पर आ गए। विरोध के बाद उनके घर में घुसकर उन्हें जमकर पीटा गया और आग लगाने की धमकी दी गई।
उत्पाद विभाग में भ्रष्टाचार का खुलासा
इसी बीच औरंगाबाद उत्पाद अधीक्षक अनिल कुमार आजाद पर 1.58 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति का आरोप लगने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। SVU ने उनके पटना, औरंगाबाद और जहानाबाद स्थित कार्यालयों एवं आवासों पर दबिश देकर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और बैंक पासबुक बरामद किए। यह मामला उत्पाद विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और शराब तस्करी के साथ अधिकारियों की सांठगांठ को उजागर करता है।
परिवार को छोड़ना पड़ा घर
खुशबू निशा ने बताया कि उनके घर पर शराब बेचने वाले माफियाओं ने विरोध करने पर रात में उनके घर में घुसकर हमला किया। उनके पति सलाम आलम ने कहा कि परिवार छह बच्चों के साथ सुरक्षित जगह पर रहने को मजबूर हो गया। पुलिसिया कार्रवाई की कमी के कारण वे बार-बार एसपी कार्यालय पहुंचे, लेकिन न्याय नहीं मिल सका। उन्होंने हताशा में कहा, “यदि न्याय नहीं मिला तो हम पूरे परिवार के साथ आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाएंगे।”
थाना प्रशासन की प्रतिक्रिया
हसपुरा थानाध्यक्ष ने प्रारंभ में मामले की जानकारी न होने का दावा किया। बाद में उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले को संज्ञान में लेकर जांच और कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
यह घटना शराबबंदी कानून के पालन में सरकारी और प्रशासनिक अक्षमता और माफियाओं के आतंक की गंभीर तस्वीर पेश करती है। उत्पाद विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप कानून के क्रियान्वयन पर बड़े सवाल खड़े करते हैं और राज्य सरकार के लिए चुनौती बनते हैं कि वह कानून और सुरक्षा को सुनिश्चित करे।