

हुगली/कोलकाता:
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार हुगली जिला राजनीतिक बदलाव का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। कभी तृणमूल कांग्रेस (TMC) का मजबूत गढ़ माने जाने वाले हुगली जिले में मतदाताओं ने बड़ा राजनीतिक संदेश देते हुए 18 में से 16 विधानसभा सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों को विजय दिलाई। वहीं TMC अपने परंपरागत समर्थकों वाले क्षेत्र में मात्र 2 सीटों तक सिमट कर रह गई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हुगली जिले की जनता ने यह फैसला केवल सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि विकास, रोजगार, शिक्षा और बेहतर प्रशासन की उम्मीदों के साथ लिया है। लंबे समय तक वामपंथी शासन और उसके बाद TMC सरकार को अवसर देने के बाद अब मतदाताओं ने भाजपा को जिम्मेदारी सौंपते हुए बदलाव की स्पष्ट इच्छा जाहिर की है।
हुगली जिले को पश्चिम बंगाल की राजनीति का बेहद जागरूक और निर्णायक क्षेत्र माना जाता है। यहां के मतदाता स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी गहरी नजर रखते हैं। यही कारण है कि यहां का जनादेश हमेशा राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जाता रहा है।

हुगली जिले की श्रीरामपुर विधानसभा सीट के राजनीतिक माहौल पर अंतरराष्ट्रीय तबला वादक आदित्य नारायण बनर्जी (Aditya Narayan Banerjee) ने सच्चा दोस्त न्यूज़ Sachcha Dost News से विशेष बातचीत में कहा कि बंगाल की जनता ने वर्षों तक संघर्ष, राजनीतिक हिंसा और सत्ता परिवर्तन के कई दौर देखे हैं।
उन्होंने कहा,
“बंगाल की धरती ने लंबे समय तक दर्द और राजनीतिक अस्थिरता झेली है। पहले कांग्रेस ने बंगाल को अपनी राजनीतिक विरासत समझा, फिर वामपंथी सरकार ने लगभग तीन दशकों तक शासन किया। उसके बाद जनता ने बदलाव की उम्मीद के साथ TMC पर विश्वास जताया, लेकिन अपेक्षित विकास नहीं हो सका। इस बार बंगाल की जनता ने फिर परिवर्तन की लहर पैदा कर भाजपा को अवसर दिया है।”
आदित्य नारायण बनर्जी ने इतिहास के पन्नों को याद करते हुए यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक बूथ कैप्चरिंग और राजनीतिक हिंसा चुनावी प्रक्रिया की बड़ी चुनौती रही है, जिसका सीधा असर मतदान पर पड़ता था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भी मतदान और मतगणना के दौरान कई हिंसक घटनाएं देखने को मिली थीं।
हालांकि इस बार स्थिति पहले की तुलना में काफी अलग दिखाई दी। बनर्जी के अनुसार चुनाव आयोग और अर्धसैनिक बलों की सक्रिय भूमिका के कारण मतदान और मतगणना दोनों को काफी शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया गया। पूरे चुनाव के दौरान केवल कुछ छिटपुट हिंसक घटनाएं सामने आईं, जिनमें 24 परगना जिले की फलता विधानसभा सीट पर हुआ मतदान विवाद तथा मतगणना के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी Suvendu Adhikari के करीबी सहयोगी की हत्या जैसी घटनाएं प्रमुख रहीं।
इसके बावजूद राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस बार मतदाताओं में उत्साह और चुनाव आयोग के प्रति विश्वास स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। यही कारण रहा कि राज्य में बंपर मतदान दर्ज किया गया और बड़ी संख्या में लोगों ने बिना भय के अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
आदित्य नारायण बनर्जी ने आगे कहा कि बंगाल के लोगों को अब शिक्षा, रोजगार और उद्योग के क्षेत्र में ठोस विकास की उम्मीद है। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और केंद्र की भारतीय जनता पार्टी Bharatiya Janata Party सरकार आपसी तालमेल के साथ राज्य के विकास को नई दिशा देने का कार्य करेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि श्रीरामपुर सीट से विधायक चुने गए भास्कर भट्टाचार्य Bhaskar Bhattacharya तथा चुंचुड़ा क्षेत्र में सुबीर नाग Subir Nag के नेतृत्व में क्षेत्र में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी और जनता को कई नई उपलब्धियां देखने को मिलेंगी।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार हुगली जिले में भाजपा की यह बड़ी जीत केवल चुनावी सफलता नहीं, बल्कि बंगाल की बदलती राजनीतिक सोच और लोकतंत्र में बढ़ते जनविश्वास का प्रतीक है। विशेषज्ञों का मानना है कि शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न होना चुनाव आयोग और सुरक्षा बलों की बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी, जिसने मतदाताओं को निर्भय होकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर दिया।


