
आजमगढ़: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के निजामाबाद कस्बे की ब्लैक पॉटरी मुगलकाल से ही अपनी अनोखी हस्तशिल्प कला के लिए जानी जाती है। यह कला बिना पेंट या रंग के काली मिट्टी से बर्तन, मूर्तियां, आभूषण और सजावटी सामान बनाने की पारंपरिक विधि है।
ब्लैक पॉटरी की खासियत
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इसकी खूबसूरती का राज इसका गहरा प्राकृतिक काला रंग और चमक है।
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निर्माण प्रक्रिया में काली मिट्टी को बारीक पीसकर पानी में गूँथ लिया जाता है, फिर चाक पर घुमाकर आकार दिया जाता है।
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आधे सूखने पर पत्थर से घिसाई की जाती है और धूप में सुखाया जाता है।
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इसके बाद कबीश लेप, आम का छाल, बांस का पत्ता, लाल और पीली मिट्टी और सोडा लगाकर अंतिम चरण में सरसों के तेल से पॉलिश की जाती है।
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जस्ता, रांगा और पारे के मिश्रण से नक्काशी और चमक बढ़ाई जाती है।
वैश्विक मांग और पहचान
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आज लगभग 1500 परिवार इस कला से अपनी आजीविका चला रहे हैं।
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उत्पाद देश-विदेश में निर्यात किए जाते हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कला के उत्पाद को G7 बैठक में जापानी प्रधानमंत्री फ़ुमियो किशिदा को भेंट किया।
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तैयार वस्तुएँ: सजावटी सामान, फूलदान, मूर्तियां, सुराही, दीये, डाइनिंग बर्तन।
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व्यापार का अनुमानित मूल्य: 80–90 करोड़ रुपये।
ODOP योजना और स्वरोजगार
उत्तर प्रदेश सरकार ने ब्लैक पॉटरी को ODOP (One District One Product) योजना में शामिल किया है। इसके तहत कलाकारों को प्रशिक्षण, उपकरण और व्यापारिक मार्गदर्शन दिया जाता है, जिससे उन्हें स्वरोजगार और वैश्विक पहचान मिलती है।
कलाकार और पुरस्कार
निजामाबाद के कई कलाकार राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पुरस्कृत हो चुके हैं।
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प्रमुख परिवार: राजेंद्र प्रसाद प्रजापति परिवार
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सम्मानित सदस्य: शिवरतन प्रजापति, रामजतन प्रजापति, सोहित प्रजापति
इस पारंपरिक कला की विरासत समय के साथ और निखरती जा रही है और इसे विश्व स्तर पर पहचान मिली है।
