
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को देखते हुए तुर्की ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की पेशकश की है। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से टेलीफोन पर बात करते हुए सुझाव दिया कि ईरान अपने विशाल तेल भंडार का प्रस्ताव अमेरिका को दे, जिससे संभावित टकराव टाला जा सके।
प्रस्ताव की बुनियाद
तुर्की के अधिकारियों के अनुसार, यह पेशकश अमेरिका और ईरान के बीच टकराव को रोकने के लिए की गई है। एर्दोगन ने दोनों राष्ट्रपतियों के बीच टेलीकॉन्फ्रेंस आयोजित कराने की पेशकश भी की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी राष्ट्रपति मसूज पेजेश्कियन ने अभी तक तुर्की की पेशकश पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
तुर्की के हुर्रियत अखबार की कॉलमनिस्ट हांडे फिरात ने लिखा है कि अगर ईरान अमेरिका को तेल की पेशकश करता है, तो ट्रंप बातचीत की मेज पर लौट सकते हैं। फिलहाल, यह स्थिति केवल अस्थायी तनाव缓ाव ही पैदा कर रही है और संकट का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
ईरान की प्रतिक्रिया और युद्ध का खतरा
तुर्की के अधिकारी भी मानते हैं कि इस प्रस्ताव से टकराव पूरी तरह टल जाए, इसकी कोई गारंटी नहीं है। जून 2025 में हुए ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के दौरान तुर्की ने इसी तरह की पेशकश की थी, लेकिन ईरान ने उसे खारिज कर दिया था।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका द्वारा रखी गई शर्तें ईरान के लिए आत्मसमर्पण जैसा है, जिसे तेहरान स्वीकार नहीं करेगा। यदि मजबूरी बनी, तो ईरान युद्ध का विकल्प चुनेगा।
मध्यस्थता की कोशिशें जारी
तुर्की, ओमान और कतर जैसे देशों ने युद्ध को टालने के लिए दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता करने की कोशिशें तेज कर दी हैं। हालांकि, फिलहाल मध्यस्थता का कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता जा रहा है और ईरान-अमेरिका टकराव को टालने के लिए कूटनीति की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा अहम हो गई है।