Thursday, June 4

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दिल्ली में महंगी हो सकती है बिजली, जुलाई तक दरों में बड़े बदलाव के संकेत

नई दिल्ली।
देश की राजधानी दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं को आने वाले महीनों में झटका लग सकता है। अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली में बिजली की दरों में जुलाई 2026 तक बदलाव संभव है। दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) नई टैरिफ प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। हालांकि, फिलहाल आयोग अध्यक्ष के बिना ही काम कर रहा है, क्योंकि यह पद पिछले जुलाई से खाली पड़ा है।

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अधिकारियों ने बताया कि DERC अध्यक्ष की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसके पूरा होते ही बिजली दरों को लेकर निर्णय प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली में आखिरी बार बिजली की दरें सितंबर 2021 में तय की गई थीं, जबकि 2014 से आधारभूत दरों में कोई बड़ा संशोधन नहीं हुआ है।

डिस्कॉम्स ने जताई दरें बढ़ाने की जरूरत

बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) का कहना है कि बीते दस वर्षों में बिजली खरीद की लागत में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। इसके बावजूद टैरिफ में कोई समानुपातिक बदलाव नहीं हुआ। कंपनियों का तर्क है कि मौजूदा दरों पर संचालन करना मुश्किल होता जा रहा है और लागत निकालने के लिए टैरिफ में संशोधन जरूरी है।

DERC अध्यक्ष का पद जुलाई 2025 से खाली

दिल्ली बिजली नियामक आयोग के अध्यक्ष का पद जुलाई 2025 से रिक्त है। इसके बावजूद आयोग ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर बिजनेस प्लान रेगुलेशन 2023 को वित्तीय वर्ष 2026-27 तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। इस पर आम जनता से 27 जनवरी शाम 5 बजे तक सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं।

जुलाई तक पूरी हो सकती है टैरिफ संशोधन प्रक्रिया

अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा बिजनेस प्लान नियमों को एक साल के लिए बढ़ाया जाएगा, क्योंकि नए नियम अभी अंतिम रूप में नहीं आए हैं। नियमों के विस्तार के बाद डिस्कॉम्स को वर्ष 2026-27 के लिए अपने टैरिफ प्रस्ताव DERC के सामने रखने होंगे। आयोग का लक्ष्य जुलाई तक पूरी टैरिफ प्रक्रिया को पूरा करना है।

कैसे तय होंगी नई बिजली दरें

टैरिफ निर्धारण की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। पहले डिस्कॉम्स अपने अनुमानित खर्च, आय और प्रस्तावित दरों के साथ आवेदन दाखिल करते हैं। इसके बाद DERC खर्चों की जांच करता है, दक्षता लक्ष्यों का मूल्यांकन करता है और पिछले वर्षों के घाटे की समीक्षा करता है। प्रारंभिक टैरिफ सार्वजनिक किए जाते हैं, जिन पर उपभोक्ता, उद्योग संगठन और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन आपत्तियां दर्ज कर सकते हैं। सार्वजनिक सुनवाई के बाद अंतिम टैरिफ आदेश जारी किया जाता है।

देरी का बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर

अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि टैरिफ संशोधन में देरी का सीधा नुकसान उपभोक्ताओं को उठाना पड़ता है। समय पर दरें न बढ़ने से डिस्कॉम्स का राजस्व घाटा बढ़ता है, जिस पर ब्याज भी जुड़ता रहता है। बाद में जब दरें संशोधित होती हैं, तो उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई लागत के साथ-साथ ब्याज का बोझ भी उठाना पड़ता है।

DERC की भूमिका

DERC बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण की दरें तय करने के साथ-साथ बिजली कंपनियों के प्रदर्शन की निगरानी करता है। आयोग ने वर्ष 2026-27 के लिए वितरण में तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान के लक्ष्य तय किए हैं। इनमें BSES राजधानी के लिए 6.4 प्रतिशत, BSES यमुना के लिए 6.2 प्रतिशत, टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड के लिए 5.5 प्रतिशत और NDMC के लिए 6.4 प्रतिशत का लक्ष्य रखा गया है।

 

 

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