
नई दिल्ली: अमेरिका में पढ़ाई और जॉब के दौरान भारतीय युवाओं को अक्सर वह आजादी नहीं मिलती, जिसकी उन्हें उम्मीद होती है। हरियाणा के गौरव के लिए यह सच्चाई अपने अनुभवों के जरिए सामने आई। गौरव 2014 में अमेरिका पढ़ाई के लिए गए थे और उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।
गौरव ने “देसी रिटर्न” पॉडकास्ट में बताया कि अमेरिका में जॉब करते समय वीजा की अनिश्चितता और छंटनी जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ा। शुरुआती जॉब बैटरी इंजीनियर के तौर पर मिली, लेकिन 9 महीने के भीतर ही उन्हें निकाल दिया गया। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और 10,000 से ज्यादा जगह आवेदन किए। जनरल मोटर्स और टेस्ला से कॉल आई, दोनों जगह इंटरव्यू क्लियर किए और अंततः टेस्ला में जॉब जॉइन की।
नेवाडा के रेनो में R&D इंजीनियर के तौर पर काम करते हुए उन्हें समझ में आया कि नौकरी होना सुरक्षा नहीं है। इस दौरान गौरव ने पर्सनल फाइनेंस और आय के दूसरे स्रोत बनाने की रणनीति अपनाई। 2020 में उन्होंने अपना पहला घर खरीदा और बाकी कमरे रेंट पर दिए, जिससे बचत बढ़ी।
वीजा की दिक्कतों और कोविड के चलते गौरव लंबे समय तक परिवार के पास नहीं आ पाए। 2023 में भारत लौटने पर उनके माता-पिता के निधन का दुख भी सहना पड़ा।
अंततः 2025 में वीजा खत्म होने पर गौरव स्थायी रूप से भारत लौट आए। उन्होंने बताया, “भारत आकर मुझे सच में आजादी मिली। अब वीजा की कोई टेंशन नहीं, कोई अचानक सब कुछ छोड़कर जाने की चिंता नहीं।” गौरव अब अपने परिवार के साथ अधिक समय बिता रहे हैं और पिछले एक साल में पिता के साथ 11 शहर घूम चुके हैं।