Tuesday, January 13

अमेरिका: मजदूरों का हक मार रही बड़ी कंपनियां, GDP में लेबर की हिस्सेदारी ऑल-टाइम लो पर

नई दिल्ली: अमेरिका की अर्थव्यवस्था में मजदूरों की हिस्सेदारी अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप देश को फिर से महान बनाने के प्रयास में लगे हैं, लेकिन आम वर्कर्स की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है।

This slideshow requires JavaScript.

लेबर की हिस्सेदारी में रिकॉर्ड गिरावट
अमेरिका की GDP में नॉन-फार्म वर्कर्स यानी मजदूरों की हिस्सेदारी 53.8% रह गई है, जो 1947 के बाद सबसे कम है। इस तरह के आंकड़े संकलित करने की शुरुआत 1947 में हुई थी। यह प्रतिशत दर्शाता है कि कुल आर्थिक उत्पादन का कितना हिस्सा मजदूरों की वेज, सैलरी, बोनस और अन्य बेनिफिट्स के रूप में उन्हें मिल रहा है।

इतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि:

  • 1950 में लेबर की हिस्सेदारी लगभग 65% थी
  • 1960 में यह रिकॉर्ड 66% तक पहुंच गई थी
  • 2001 में यह 64% थी, लेकिन उसके बाद से इसमें लगभग 10.4% की गिरावट आई है

इसी दौरान, कॉरपोरेट प्रॉफिट मार्जिन 10.9% तक पहुंच गया है, जो अब तक का दूसरा सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। इसका मतलब साफ है कि मजदूर अधिक उत्पादक हो रहे हैं, लेकिन मुनाफे का बड़ा हिस्सा कंपनियों के पास जा रहा है।

विशेषज्ञों की चेतावनी
जानकारों का कहना है कि ऑटोमेशन और तकनीकी सुधार से कंपनियों में प्रोडक्टिविटी जरूर बढ़ी है, लेकिन इसका फायदा मजदूरों की सैलरी बढ़ाने के बजाय कॉरपोरेट मुनाफा बढ़ाने में लिया जा रहा है। इसका परिणाम यह है कि अमीर और गरीब के बीच की खाई दिन-ब-दिन गहरी होती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह देश की आर्थिक स्थिरता और सामाजिक समानता के लिए जोखिमपूर्ण साबित हो सकता है।

 

Leave a Reply