


पटना: केंद्रीय मंत्री और लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने नए साल पर एक बड़ा राजनीतिक संकल्प लिया है। उनका उद्देश्य साफ है – लोजपा (रामविलास) को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिलाना। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए चिराग पासवान अब बिहार, झारखंड और नगालैंड की सीमाओं से बाहर निकलकर असम और पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।
तीन राज्यों में पहले ही दिखा पार्टी का असर
2024 में झारखंड विधानसभा चुनाव में लोजपा ने चतरा सीट से जीत दर्ज की थी। इसी तरह नगालैंड विधानसभा चुनाव 2023 में केवल 16 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए दो सीटों पर जीत मिली थी और पार्टी को राज्य पार्टी का दर्जा भी मिला। बिहार में तो लोजपा ने अपनी जड़ें मज़बूत कर ली हैं।
राष्ट्रीय पार्टी बनने का सपना
राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने के लिए किसी दल को कम से कम तीन राज्यों में लोकसभा की कुल सीटों का 2 प्रतिशत हासिल करना या चार अलग-अलग राज्यों में कम से कम 6 प्रतिशत वोट और लोकसभा में 4 सीटें जीतना आवश्यक है। चिराग पासवान का मानना है कि असम और बंगाल में चुनाव लड़कर यह लक्ष्य पूरा किया जा सकता है।
असम-बंगाल क्यों टार्गेट?
चिराग पासवान की रणनीति साफ है –
इन राज्यों में बिहार और आसपास की स्थानीय आबादी और दलित वोट बैंक मजबूत है।
राज्य में लोजपा का पहचान बनाने और विस्तार का अवसर है।
राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने के लिए इन राज्यों में सकारात्मक वोट प्रतिशत हासिल करना जरूरी है।
चिराग पासवान फिलहाल यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि पश्चिम बंगाल और असम में अकेले चुनाव लड़ेंगे या एनडीए के साथ गठबंधन में। लेकिन उनकी कोशिश यही रहेगी कि लोजपा की पहचान स्वतंत्र और राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बन सके।
निष्कर्षतः, चिराग पासवान की 2026 की सबसे बड़ी राजनीतिक विश यही है कि लोजपा (रामविलास) को राष्ट्रीय दल का दर्जा दिलाया जाए, और इसके लिए असम-बंगाल उनका अगला बड़ा टार्गेट बन गए हैं।


