
नई दिल्ली: दिल्ली के साकेत कोर्ट परिसर में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई, जब एक कोर्ट कर्मचारी ने कथित तौर पर काम के अत्यधिक दबाव में आकर बिल्डिंग से कूदकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान अहलमद हरीश सिंह मिहार के रूप में हुई है। घटना के बाद कोर्ट कर्मचारियों में भारी आक्रोश फैल गया और स्टाफ ने हड़ताल का ऐलान कर दिया, जिससे साकेत कोर्ट का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है।
साकेत कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव धीर सिंह कसाना ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मौके से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। घटना के बाद अदालत परिसर में बड़ी संख्या में कर्मचारी और वकील एकत्रित हो गए। कर्मचारियों का कहना है कि यह आत्महत्या किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता और प्रशासनिक उत्पीड़न का नतीजा है।
स्टाफ एसोसिएशन का आरोप: सिस्टम ने बढ़ाया मानसिक दबाव
कोर्ट स्टाफ एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक भारद्वाज ने कहा कि यह मामला किसी एक सीट, एक कोर्ट या एक जिले तक सीमित नहीं है। यदि समय रहते हालात नहीं सुधारे गए, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों पर असहनीय कार्यभार डाला जा रहा है और स्पष्ट पॉलिसी व वर्क फ्रेम के बिना काम करना संभव नहीं है।
कर्मचारियों का कहना है कि एक ओर जजों की लगातार नियुक्तियां हो रही हैं, लेकिन उसी अनुपात में स्टाफ की भर्ती नहीं की जा रही। प्रमोशन में 20-20 साल तक का इंतजार कर्मचारियों पर गंभीर मानसिक दबाव बना रहा है।
स्टाफ एसोसिएशन की प्रमुख मांगें
स्टाफ एसोसिएशन ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं, जिनमें—
JJA कैडर से अहलमद/असिस्टेंट अहलमद व स्टेनो से संबंधित काम न लिया जाए।
अहलमद/असिस्टेंट अहलमद से डिजिटाइजेशन और फोटो कॉपी (CA) का कार्य न कराया जाए।
बिना लिखित अनुमति के शाम 5 बजे के बाद किसी कर्मचारी को न रोका जाए।
तय समय में फाइलों को रिकॉर्ड रूम भेजने की स्पष्ट व्यवस्था बने।
ट्रांसफर पॉलिसी लागू हो और पोस्टिंग में वरिष्ठता का ध्यान रखा जाए।
केस पेंडेंसी के अनुसार कोर्ट में स्टाफ की तैनाती हो।
हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में किए गए प्रशासनिक सुधारों को दोबारा लागू किया जाए।
MACP और प्रमोशन समय पर दिए जाएं।
महीने में एक बार हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के समक्ष कर्मचारियों की शिकायतें रखने की व्यवस्था हो।
सुसाइड नोट में छलका दर्द
पुलिस को मिले सुसाइड नोट में मृतक हरीश सिंह मिहार ने लिखा है कि वह ऑफिस के काम के दबाव के कारण आत्महत्या कर रहा है। नोट में उसने यह भी उल्लेख किया कि अहलमद बनने के बाद से ही उसके मन में आत्महत्या के विचार आ रहे थे, जिन्हें वह काबू में रखने की कोशिश करता रहा, लेकिन अंततः असफल रहा।
घटना ने न्यायिक व्यवस्था में कर्मचारियों पर बढ़ते दबाव और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है, वहीं कर्मचारियों की हड़ताल के चलते साकेत कोर्ट का न्यायिक कामकाज पूरी तरह से प्रभावित है।