
कोलकाता में आईपैक (IPAC) के ऑफिस और इसके निदेशक के घर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा दी है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आरोप लगाया है कि ईडी पार्टी की चुनावी रणनीति और डेटा जब्त करने की कोशिश कर रही है।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में विरोध मार्च का नेतृत्व किया। पार्टी के वरिष्ठ नेता, मंत्री, सांसद, विधायक और बड़ी संख्या में समर्थक उनके साथ थे। 8B बस स्टैंड से शुरू हुआ मार्च हाजरा मोड़ की ओर बढ़ा। ममता ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर राजनीतिक प्रतिशोध के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।
इससे पहले दिल्ली में टीएमसी सांसदों ने ईडी की कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया। दिल्ली पुलिस ने आठ सांसदों को अस्थायी रूप से हिरासत में लिया। सांसदों में डेरेक ओ’ब्रायन, शताब्दी रॉय, महुआ मोइत्रा, बापी हलदर, साकेत गोखले, प्रतिमा मंडल, कीर्ति आज़ाद और डॉ. शर्मिला सरकार शामिल थे।
ममता बनर्जी ने सांसदों के खिलाफ किए गए “शर्मनाक और गलत बर्ताव” की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सत्ता में बैठे लोगों की सुविधा या आराम से नहीं चलता। विपक्षी सांसदों को घसीटकर हिरासत में लेना लोकतंत्र का अपमान है।
आई-पैक के छापे से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई कलकत्ता हाईकोर्ट ने 14 जनवरी तक स्थगित कर दी। कोर्टरूम में हंगामे के कारण जस्टिस सुव्रा घोष ने सुनवाई टालने का निर्णय लिया।
टीएमसी का आरोप है कि बीजेपी ईडी के जरिए उनकी चुनावी तैयारी और संगठनात्मक डेटा को हड़पने का प्रयास कर रही है। ममता बनर्जी का मार्च और सांसदों के विरोध प्रदर्शन ने बंगाल में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।