Tuesday, January 13

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मोदी की लाहौर यात्रा के 10 साल शांति की उम्मीद से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ तक: कैसे बदली भारत–पाकिस्तान की कहानी
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मोदी की लाहौर यात्रा के 10 साल शांति की उम्मीद से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ तक: कैसे बदली भारत–पाकिस्तान की कहानी

    आज से ठीक दस साल पहले, 25 दिसंबर 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक लाहौर पहुंचकर न सिर्फ पाकिस्तान, बल्कि पूरी दुनिया को चौंका दिया था। यह वही दिन था, जब मोदी ने सुबह का नाश्ता काबुल में किया, दोपहर का भोजन लाहौर में और रात का डिनर दिल्ली में। महज दो घंटे की यह यात्रा भारत–पाकिस्तान संबंधों के इतिहास में शांति की एक नई उम्मीद के रूप में दर्ज हुई थी।   तब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ थे। मोदी का लाहौर पहुंचना इतना अप्रत्याशित था कि दोनों देशों के राजनयिक तंत्र तक को इसकी भनक नहीं थी। नवाज शरीफ के पारिवारिक समारोह में प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी, गले मिलना और गर्मजोशी भरी बातचीत ने यह संकेत दिया था कि शायद उपमहाद्वीप की सबसे पुरानी दुश्मनी अब संवाद के रास्ते पर आगे बढ़ेगी।   उम्मीदें टूटीं, भरोसा चकनाचूर   लेकिन यह उम्मीद ज्यादा दिनों तक ...
बलूचिस्तान अटल बिहारी वाजपेयी को नहीं भूल सकता बलोच नेता मीर यार को क्यों याद आए भारत के पूर्व प्रधानमंत्री?
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बलूचिस्तान अटल बिहारी वाजपेयी को नहीं भूल सकता बलोच नेता मीर यार को क्यों याद आए भारत के पूर्व प्रधानमंत्री?

  इस्लामाबाद। पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत से एक बार फिर ऐसा बयान सामने आया है, जिसने दक्षिण एशिया की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। बलूचिस्तान की निर्वासित सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले अलगाववादी नेता मीर यार बलूच ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा है कि बलूचिस्तान के लोग आज भी वाजपेयी को याद करते हैं और उनकी विरासत का सम्मान करते हैं।   पाकिस्तानी सरकार और सेना के कट्टर आलोचक मीर यार बलूच ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर वाजपेयी की तस्वीर साझा करते हुए उन्हें “ईमानदारी, शालीनता और नैतिक साहस का प्रतीक” बताया। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी केवल भारत के ही नहीं, बल्कि पूरे उपमहाद्वीप के लिए एक असाधारण राजनेता थे।   “वाजपेयी जैसे नेता कभी खत्म नहीं होते”   मीर यार बलूच ने अपने संदेश में ...
असीम मुनीर का CDF बनना ‘हराम’? पाकिस्तानी मुफ्ती के बयान से सेना के खिलाफ धार्मिक मोर्चा, शहबाज शरीफ संकट में
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असीम मुनीर का CDF बनना ‘हराम’? पाकिस्तानी मुफ्ती के बयान से सेना के खिलाफ धार्मिक मोर्चा, शहबाज शरीफ संकट में

  इस्लामाबाद। पाकिस्तान में सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) बनाए जाने के बाद सियासी विवाद अब धार्मिक रंग लेने लगा है। इस पद को बनाने वाले 27वें संवैधानिक संशोधन पर अब सीधे इस्लामी सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप लगा है। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम–फजल (JUI-F) से जुड़े वरिष्ठ इस्लामी विद्वान और मुफ्ती तकी उस्मानी ने असीम मुनीर को दी गई आजीवन कानूनी छूट को “इस्लामी दृष्टि से हराम” करार दिया है।   मुफ्ती तकी उस्मानी के इस बयान ने न सिर्फ पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार को भी असहज स्थिति में ला खड़ा किया है।   ‘जवाबदेही से ऊपर कोई नहीं’   CNN-News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, मुफ्ती तकी उस्मानी ने कहा कि इस्लाम किसी भी व्यक्ति को जवाबदेही से ऊपर रखने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने स...
पाकिस्तान नहीं खरीदेगा J-35 स्टील्थ जेट मुस्लिम देशों में चीनी लड़ाकू विमानों की बढ़ती मांग, पेंटागन का खुलासा
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पाकिस्तान नहीं खरीदेगा J-35 स्टील्थ जेट मुस्लिम देशों में चीनी लड़ाकू विमानों की बढ़ती मांग, पेंटागन का खुलासा

  चीन के उभरते सैन्य सामर्थ्य को लेकर अमेरिका की चिंता एक बार फिर पेंटागन की ताजा रिपोर्ट में सामने आई है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कांग्रेस को सौंपी अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि चीन अपने उन्नत लड़ाकू विमानों के निर्यात की तैयारी में है, लेकिन इसके साथ ही एक चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि पाकिस्तान, चीनी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट J-35 का संभावित ग्राहक नहीं है।   पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार, चीन कम से कम तीन लड़ाकू विमानों—J-35, चौथी पीढ़ी के J-10C और JF-17—को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने की योजना बना रहा है। इनमें से JF-17 को पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर विकसित किया है, जबकि J-10C फिलहाल केवल पाकिस्तान की वायुसेना के पास है।   मुस्लिम देशों में चीनी जेट्स को लेकर उत्साह   रिपोर्ट में बताया गया है कि हालांकि मई 2025 तक J-35 की कोई औपचारि...
बांग्लादेश के ‘डार्क प्रिंस’ की वापसी 17 साल बाद ढाका लौटे BNP प्रमुख तारिक रहमान, क्या वही होंगे अगले प्रधानमंत्री?
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बांग्लादेश के ‘डार्क प्रिंस’ की वापसी 17 साल बाद ढाका लौटे BNP प्रमुख तारिक रहमान, क्या वही होंगे अगले प्रधानमंत्री?

    बांग्लादेश की राजनीति में लंबे समय बाद एक बड़ा और निर्णायक मोड़ देखने को मिला है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बड़े बेटे तारिक रहमान करीब 17 साल के निर्वासन के बाद गुरुवार को अपनी पत्नी और बेटी के साथ ढाका लौट आए। उनकी वापसी को फरवरी 2026 में होने वाले संसदीय चुनावों से पहले सबसे अहम सियासी घटनाक्रम माना जा रहा है।   60 वर्षीय तारिक रहमान को बीएनपी का वास्तविक रणनीतिकार और पार्टी का सबसे प्रभावशाली चेहरा माना जाता है। अवामी लीग की अनुपस्थिति में बीएनपी को चुनावों की सबसे मजबूत दावेदार पार्टी माना जा रहा है, ऐसे में तारिक रहमान का नाम अगले प्रधानमंत्री के रूप में तेजी से उभर रहा है।   क्यों कहा गया ‘डार्क प्रिंस’?   तारिक रहमान, बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जनरल जियाउर्रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री...
बांग्लादेश में शेख हसीना का राजनीतिक अध्याय समाप्त?
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बांग्लादेश में शेख हसीना का राजनीतिक अध्याय समाप्त?

      बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी पार्टी अवामी लीग को बड़ा राजनीतिक झटका देते हुए फरवरी 2026 में होने वाले संसदीय चुनावों में भाग लेने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है। मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अवामी लीग पर लगाया गया प्रतिबंध बरकरार रहेगा।   बुधवार को मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्य सलाहकार के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने कहा कि सरकार की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है और अवामी लीग को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखने के फैसले में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा। 1971 में बांग्लादेश की आज़ादी के बाद यह पहला मौका होगा, जब देश की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक पार्टी को चुनाव से बाहर कर दिया गया है।   अमेरिकी दबाव के बावजूद सरकार अडिग   यह फैसला ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका के पांच स...
कट्टरपंथियों के दबाव में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार, कैबिनेट में इस्तीफों की झड़ी, कुर्सी पर मंडराया संकट
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कट्टरपंथियों के दबाव में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार, कैबिनेट में इस्तीफों की झड़ी, कुर्सी पर मंडराया संकट

  ढाका। बांग्लादेश में फरवरी 2026 में प्रस्तावित आम चुनाव से पहले मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार गंभीर राजनीतिक संकट में फंसती दिख रही है। यूनुस प्रशासन से एक के बाद एक सलाहकारों और अधिकारियों के इस्तीफों ने सरकार की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा झटका तब लगा, जब गृह मामलों से जुड़े राज्य मंत्री स्तर के अधिकारी खोदा बख्श चौधरी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है।   सरकारी हलकों में साफ कहा जा रहा है कि यह इस्तीफा किसी प्रशासनिक या नैतिक कारण से नहीं, बल्कि कट्टरपंथी संगठनों के दबाव का नतीजा है। इससे यह संकेत मिलता है कि यूनुस सरकार की राजनीतिक पकड़ तेजी से कमजोर हो रही है।   हत्या के बाद बढ़ा दबाव, सड़कों पर उतरे कट्टरपंथी   कट्टरपंथी नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद यूनुस प्रशासन के खिलाफ असंतोष...
इस्लामी पहचान के साए में बड़ा फैसला: 50 साल बाद दुनिया को शराब बेचेगा पाकिस्तान, सेना प्रमुख मुनीर के घर के पास फैक्ट्री
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इस्लामी पहचान के साए में बड़ा फैसला: 50 साल बाद दुनिया को शराब बेचेगा पाकिस्तान, सेना प्रमुख मुनीर के घर के पास फैक्ट्री

  इस्लामाबाद। खुद को इस्लामी मूल्यों का प्रहरी बताने वाले पाकिस्तान ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने उसकी वैचारिक पहचान पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। पचास वर्षों से अधिक समय के प्रतिबंध के बाद पाकिस्तान की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी शराब कंपनी मरी ब्रूअरी को शराब के विदेशी निर्यात की अनुमति दे दी गई है। इसके साथ ही पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय शराब बाजार में कदम रखने जा रहा है।   इस फैसले के बाद रावलपिंडी स्थित मरी ब्रूअरी की फैक्ट्री में उत्पादन तेज कर दिया गया है। शराब की बोतलों और कैनों से भरी फैक्ट्री का यह दृश्य उस मुस्लिम-बहुल देश में चौंकाने वाला है, जहां शराब पीना, खरीदना और बेचना मुसलमानों के लिए गैरकानूनी है।   ब्रिटिश दौर से लेकर आज तक का सफर   मरी ब्रूअरी की स्थापना 1860 में ब्रिटिश भारत के दौरान हुई थी। उस समय इसका उद्देश्य ब्रिटिश सैनिकों और औपनिवे...
तारिक रहमान की 17 साल बाद वतन वापसी: बांग्लादेश की सत्ता-समीकरण में बड़ा मोड़, भारत के लिए राहत या नई चुनौती?
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तारिक रहमान की 17 साल बाद वतन वापसी: बांग्लादेश की सत्ता-समीकरण में बड़ा मोड़, भारत के लिए राहत या नई चुनौती?

  ढाका। बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के पुत्र तारिक रहमान की लगभग 17 वर्षों बाद स्वदेश वापसी देश की सत्ता की लड़ाई को नया आयाम दे रही है। उनकी वापसी ऐसे समय हो रही है जब बांग्लादेश राजनीतिक अस्थिरता, हिंसक आंदोलनों और कट्टरपंथी ताकतों के उभार से जूझ रहा है, वहीं फरवरी 2026 में आम चुनाव प्रस्तावित हैं।   राजनीतिक शून्य में तारिक की एंट्री   शेख हसीना की अवामी लीग को चुनावी प्रक्रिया से बाहर किए जाने के बाद देश में जो राजनीतिक शून्य पैदा हुआ, उसे भरने की कोशिश कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी कर रहा है। ऐसे में तारिक रहमान की वापसी को लोकतांत्रिक राजनीति की संभावित वापसी के तौर पर देखा जा रहा है। ढाका में उनके स्वागत के लिए उमड़ी भारी भीड़ इस बात का संकेत ह...
H-1B वीजा फीस 1 लाख डॉलर करने पर ट्रंप को कोर्ट का साथ, भारतीयों को बड़ा झटका
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H-1B वीजा फीस 1 लाख डॉलर करने पर ट्रंप को कोर्ट का साथ, भारतीयों को बड़ा झटका

  वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के H-1B वीजा आवेदन फीस बढ़ाने के फैसले को अदालत ने मान्यता दे दी है। फेडरल डिस्ट्रिक्ट जज बेरिल हॉवेल ने इस फैसले को कानूनी अधिकार के दायरे में बताया और कहा कि राष्ट्रपति ने अपने प्रशासन की इमिग्रेशन पॉलिसी के तहत यह कदम उठाया है। इस फैसले से विदेशी कामगारों, खासकर भारतीय पेशेवरों को बड़ा झटका लगा है।   कोर्ट ने क्या कहा जज हॉवेल ने अपने फैसले में लिखा, “कांग्रेस ने राष्ट्रपति को आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में व्यापक अधिकार दिए हैं। जब तक ये फैसले कानून के भीतर रहते हैं, अदालत को उनकी राजनीतिक समझ पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।”   यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स ने इस फैसले पर रोक लगाने के लिए मुकदमा दायर किया था। चैंबर का कहना था कि बढ़ी हुई फीस छोटे व्यवसायों के लिए H-1B वीजा महंगा कर देगी। लेकिन अदालत ने इसे खार...