मोदी की लाहौर यात्रा के 10 साल शांति की उम्मीद से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ तक: कैसे बदली भारत–पाकिस्तान की कहानी
आज से ठीक दस साल पहले, 25 दिसंबर 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक लाहौर पहुंचकर न सिर्फ पाकिस्तान, बल्कि पूरी दुनिया को चौंका दिया था। यह वही दिन था, जब मोदी ने सुबह का नाश्ता काबुल में किया, दोपहर का भोजन लाहौर में और रात का डिनर दिल्ली में। महज दो घंटे की यह यात्रा भारत–पाकिस्तान संबंधों के इतिहास में शांति की एक नई उम्मीद के रूप में दर्ज हुई थी।
तब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ थे। मोदी का लाहौर पहुंचना इतना अप्रत्याशित था कि दोनों देशों के राजनयिक तंत्र तक को इसकी भनक नहीं थी। नवाज शरीफ के पारिवारिक समारोह में प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी, गले मिलना और गर्मजोशी भरी बातचीत ने यह संकेत दिया था कि शायद उपमहाद्वीप की सबसे पुरानी दुश्मनी अब संवाद के रास्ते पर आगे बढ़ेगी।
उम्मीदें टूटीं, भरोसा चकनाचूर
लेकिन यह उम्मीद ज्यादा दिनों तक ...









