Wednesday, April 8

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ChatGPT ऐप स्टोर लॉन्च: अब चैट के दौरान किराये का घर खोजें और ग्रॉसरी ऑर्डर करें
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ChatGPT ऐप स्टोर लॉन्च: अब चैट के दौरान किराये का घर खोजें और ग्रॉसरी ऑर्डर करें

नई दिल्ली: OpenAI ने ChatGPT के लिए नया ऐप स्टोर लॉन्च कर दिया है। अब यूजर्स चैट करते समय सीधे Adobe, Canva, Google Drive जैसे ऐप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके जरिए आप किराये का अपार्टमेंट सर्च कर सकते हैं, ग्रॉसरी ऑर्डर कर सकते हैं और ऑफिस प्रेजेंटेशन तैयार कर सकते हैं – वो भी बिना चैट छोड़े। कैसे काम करेगा ऐप स्टोर? यूजर्स को किसी ऐप को इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं है। बस Connect बटन दबाकर ऐप को ऑथराइज करना होगा। एक बार कनेक्ट होने के बाद आप चैटिंग बार में @ के साथ ऐप का नाम लिखकर उसका इस्तेमाल कर सकते हैं। मोबाइल ऐप में इसे प्रोफाइल सेक्शन के Apps विकल्प से एक्सेस किया जा सकता है। ऐप स्टोर को फिलहाल फीचर्ड, लाइफस्टाइल और प्रोडक्टिविटी जैसे तीन हिस्सों में बांटा गया है। पुराने फीचर्स में बदलाव OpenAI अब ऐसे फीचर पर काम कर रहा है जो चैट के दौरान सही ऐप का सुझाव देगा। इसके साथ ही पुराने ...
स्टारलिंक दे रही फ्री राउटर अपग्रेड, केवल पुराने यूजर्स ही उठा पाएंगे फायदा
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स्टारलिंक दे रही फ्री राउटर अपग्रेड, केवल पुराने यूजर्स ही उठा पाएंगे फायदा

नई दिल्ली: Elon Musk की कंपनी Starlink अपने पुराने यूजर्स को खास तोहफा दे रही है। कंपनी अपने पुराने ग्राहकों को लगभग 4000 रुपये कीमत का राउटर फ्री में अपग्रेड कर रही है। नए राउटर में पुराने मॉडल के मुकाबले बेहतर सुरक्षा, परफॉर्मेंस और नए फीचर्स हैं। कौन उठा पाएगा फायदा? यह सुविधा केवल उन यूजर्स के लिए है, जो पहले से Starlink की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस का इस्तेमाल कर रहे हैं। कंपनी अब Gen 1 राउटर के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं भेजेगी, इसलिए पुराने राउटर का अपग्रेड करना जरूरी और सुरक्षित है। नए राउटर में Wi-Fi 6 और डुअल-बैंड Wi-Fi का सपोर्ट मौजूद है, जो Gen 1 राउटर में नहीं था। राउटर अपग्रेड क्यों जरूरी है? नए राउटर से नेटवर्क की सुरक्षा बढ़ेगी और बेहतर इंटरनेट परफॉर्मेंस मिलेगी। पुराने राउटर अचानक काम करना बंद नहीं करेंगे, लेकिन उन्हें नए फीचर्स और सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं मिलेंगे। इसके अलावा, ज...
सैम ऑल्टमैन ने ChatGPT यूजर्स को दिया क्रिसमस गिफ्ट, बस एक इमोजी से बनाएं पर्सनलाइज्ड वीडियो
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सैम ऑल्टमैन ने ChatGPT यूजर्स को दिया क्रिसमस गिफ्ट, बस एक इमोजी से बनाएं पर्सनलाइज्ड वीडियो

नई दिल्ली: OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने क्रिसमस 2025 को खास बनाने के लिए ChatGPT यूजर्स के लिए एक अनोखा तोहफा पेश किया है। इसके लिए यूजर्स को सिर्फ एक साधारण सा 🎁 गिफ्ट इमोजी इस्तेमाल करना होगा। यह इमोजी ChatGPT पर एक प्रॉम्प्ट की तरह काम करता है और यूजर्स अपने लिए पर्सनलाइज्ड क्रिसमस वीडियो बना सकते हैं। ऑल्टमैन ने अपने X (पूर्व Twitter) अकाउंट पर एक वीडियो शेयर करते हुए बताया कि यह एक छोटी हिंट है। यूजर्स इस इमोजी को ChatGPT में भेजकर अपने सेल्फी के साथ वीडियो बना सकते हैं। ChatGPT फिर OpenAI के वीडियो जेनरेशन टूल Sora का उपयोग करके एक एनिमेटेड क्रिसमस वीडियो तैयार करता है। वीडियो में क्या होता है? बने हुए वीडियो में सांता क्लॉज यूजर का नाम लेकर उनसे बात करता है और बताता है कि उनके लिए गिफ्ट आया है। वीडियो में यूजर का एनिमेटेड वर्जन भी दिखता है। वीडियो मजाकिया और प्यारे अंदाज में यूजर ...
चीन में अचानक ठप पड़ा GPS: नानजिंग में छह घंटे तक ठहर गया डिजिटल जीवन
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चीन में अचानक ठप पड़ा GPS: नानजिंग में छह घंटे तक ठहर गया डिजिटल जीवन

नानजिंग (जियांगसू) – चीन के पूर्वी शहर नानजिंग में 17 दिसंबर, 2025 को एक अनोखी घटना ने शहरवासियों की दिनचर्या पर बड़ा असर डाला। शाम लगभग चार बजे से रात दस बजे तक छह घंटे तक GPS और चीन के BeiDou सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम ठप पड़ गए। इस दौरान कैब बुकिंग, फूड डिलीवरी, ड्रोन सेवाएं और मोबाइल में लोकेशन शेयरिंग जैसी सुविधाएं पूरी तरह प्रभावित हुईं। शहर के लोग, खासकर जो नई जगह पर थे, अपनी लोकेशन पता करने में असमर्थ रहे। क्या हुआ और क्यों? नानजिंग सैटेलाइट एप्लीकेशन इंडस्ट्री एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार, यह समस्या मोबाइल नेटवर्क की खराबी की वजह से नहीं हुई। वास्तविक कारण था GNSS (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) सिग्नल पर भारी दखल। इस दखल ने सिर्फ आम लोगों के इस्तेमाल वाले GPS और BeiDou फ्रीक्वेंसी बैंड को प्रभावित किया। परिणामस्वरूप फोन और अन्य डिवाइस सैटेलाइट सिग्नल को सही से पकड़ नहीं पाए। यह...
वैज्ञानिकों ने खोजा पृथ्वी की गति से बिजली बनाने का अनोखा तरीका, अगर सफल हुआ तो बिल होगा जीरो
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वैज्ञानिकों ने खोजा पृथ्वी की गति से बिजली बनाने का अनोखा तरीका, अगर सफल हुआ तो बिल होगा जीरो

नई दिल्ली। वैज्ञानिकों ने बिजली बनाने का एक अनोखा और बेहद क्रांतिकारी तरीका खोजा है। अगर यह तकनीक सफल हो गई तो बिजली का बिल लगभग जीरो हो सकता है, क्योंकि प्रोडक्शन लागत न के बराबर होगी। इस नई खोज में पृथ्वी की घूमने की गति और उसके मेग्नेटिक फील्ड का इस्तेमाल किया गया है। कैसे काम करती है यह तकनीक? अमेरिका के न्यू जर्सी में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी और नासा के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के वैज्ञानिकों ने एक छोटी मशीन बनाई है। यह मशीन पृथ्वी के अपने मेग्नेटिक फील्ड में घूमने से बिजली उत्पन्न करती है। प्रारंभिक प्रयोग में यह मशीन सिर्फ कुछ माइक्रोवोल्ट बिजली बना पाई, लेकिन इसका मतलब है कि भविष्य में इसे बड़े पैमाने पर विकसित किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि पृथ्वी के अंदर गर्म धातु की हलचल से एक बड़ा मेग्नेटिक फील्ड बनता है। जब पृथ्वी घूमती है, तो यह क्षेत्र अंतरिक्ष में स्थिर रहता है। इस म...
रात को सोने से पहले इन 6 चीज़ों का प्लग निकालें, आएगी चैन की नींद और बचेगा बिजली का बिल
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रात को सोने से पहले इन 6 चीज़ों का प्लग निकालें, आएगी चैन की नींद और बचेगा बिजली का बिल

नई दिल्ली। हमारे घरों में कई ऐसे गैजेट और अप्लायंस होते हैं जिन्हें हम एक बार प्लग में लगाकर भूल जाते हैं। ये सिर्फ बिजली की खपत बढ़ाते ही नहीं, बल्कि आपकी नींद और स्वास्थ्य पर भी असर डालते हैं। आइए जानते हैं उन 6 चीज़ों के बारे में, जिन्हें रात को सोते समय या इस्तेमाल के बाद हर हाल में प्लग से निकालना चाहिए। 1. राउटर रात में सोते समय WiFi राउटर का प्लग निकालना जरूरी है। लगातार काम करने वाले राउटर से निकलने वाली वेव्स नींद में खलल डाल सकती हैं। कोशिश करें कि इंटरनेट राउटर उस कमरे में न हो जिसमें आप सोते हैं। 2. मोबाइल और लैपटॉप चार्जर चार्जर प्लग में लगे रहने से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बिजली खपत होती रहती है। इसके अलावा, खराब चार्जर से आग लगने का खतरा भी रहता है। सोने से पहले इन्हें अनप्लग करना सुरक्षा और बिजली बचत दोनों के लिए फायदेमंद है। 3. हीटर और गीजर सर्दियों में इस्तेमाल होने व...
तार वाला या बिना तार वाला ईयरफोन: जानें कौन सा आपके लिए बेहतर है
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तार वाला या बिना तार वाला ईयरफोन: जानें कौन सा आपके लिए बेहतर है

नई दिल्ली। आजकल गाने सुनने या कॉल करने के लिए ईयरफोन हर किसी के लिए जरूरी हो गए हैं। मार्केट में दो प्रकार के ईयरफोन उपलब्ध हैं — वायर्ड (तार वाले) और वायरलेस (बिना तार वाले)। लेकिन अक्सर लोग कंफ्यूज रहते हैं कि कौन सा ईयरफोन उनके लिए बेहतर रहेगा। आइए जानते हैं दोनों के फायदे और नुकसान। वायरलेस ईयरफोन के फायदे तार की झंझट से मुक्ति: इन्हें ब्लूटूथ से कनेक्ट किया जाता है, इसलिए फोन जेब में रखने के बावजूद आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं। मुफ्त आवाज़ और नॉइज़ कैंसलेशन: कई मॉडल बाहरी आवाज़ को रोकते हैं और ऑडियो क्वालिटी भी बेहतर होती है। मोबिलिटी: जिम या दौड़ते समय तार उलझने की समस्या नहीं होती। रेंज: 10-15 मीटर तक ब्लूटूथ से कनेक्शन। बैटरी लाइफ: कुछ मॉडल में 5-10 घंटे तक चलती है। नुकसान: बैटरी खत्म होने पर काम नहीं करेंगे। चार्जिंग समय लगता है और अक्सर महंगे ह...
पासपोर्ट पर पता बदलवाना अब आसान, घर बैठे ऑनलाइन करें अप्लाई पुराना पता होने से हो सकती है परेशानी, नया पासपोर्ट बनेगा अपडेटेड एड्रेस के साथ
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पासपोर्ट पर पता बदलवाना अब आसान, घर बैठे ऑनलाइन करें अप्लाई पुराना पता होने से हो सकती है परेशानी, नया पासपोर्ट बनेगा अपडेटेड एड्रेस के साथ

नई दिल्ली। क्या आपके पासपोर्ट पर पुराना पता दर्ज है? यह सिर्फ यात्रा के दौरान ही नहीं, बल्कि पहचान पत्र के रूप में भी अहम है। गलत या पुराना पता इमिग्रेशन, वीजा अप्लाई और अन्य प्रशासनिक कामों में समस्या पैदा कर सकता है। लेकिन अच्छी खबर यह है कि पासपोर्ट पर एड्रेस अपडेट कराना अब घर बैठे ऑनलाइन किया जा सकता है। पता बदलने पर नया पासपोर्ट जारी होगा पासपोर्ट में एड्रेस बदलना पर्सनल डिटेल्स में बदलाव माना जाता है। इसलिए मौजूदा पासपोर्ट में बदलाव करने के बजाय नया पासपोर्ट जारी किया जाता है। यह सुरक्षा और सही वेरिफिकेशन सुनिश्चित करता है, ताकि भविष्य में किसी तरह की कानूनी या प्रशासनिक परेशानी न हो। ऑनलाइन आवेदन कैसे करें Passport Seva वेबसाइट पर जाकर अपने अकाउंट में लॉग-इन करें। Passport Re-issue विकल्प चुनें और कारण में Change of Personal Particulars दर्ज करें। अपना नया पता सही-स...
Truecaller संकट में? CNAP फीचर के लागू होने से भारत में हो सकता है बड़ा बदलाव सरकारी टेक्नोलॉजी से कॉलर की पहचान अब बिना ऐप के होगी, भविष्य में Truecaller पर असरनई दिल्ली। भारत में Truecaller के करीब 25 करोड़ यूजर्स हैं, जो इसे मुख्य रूप से अनजान नंबरों की पहचान के लिए इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अब सरकार के CNAP (Calling Name Presentation) फीचर के लागू होने के बाद यह स्थिति बदल सकती है। CNAP सीधे मोबाइल नेटवर्क पर उपलब्ध होगा, जिससे यूजर्स को कॉलर का नाम जानने के लिए किसी अलग ऐप की जरूरत नहीं होगी। CNAP क्या है और कैसे काम करेगा? CNAP एक नेटवर्क-लेवल फीचर है। इसके जरिए: •	आपके फोन पर आने वाले कॉल पर सिर्फ नंबर नहीं, कॉल करने वाले का नाम भी दिखेगा। •	इसके लिए किसी ऐप को इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं होगी। •	यूजर को अपनी प्राइवेसी परमिशन देने की आवश्यकता भी नहीं होगी। सरकार का उद्देश्य स्पैम कॉल को कम करना और यूजर्स को अधिक सुरक्षित बनाना है। Truecaller पर CNAP का असर Truecaller का मुख्य फीचर—कॉलर का नाम दिखाना—अब CNAP के जरिए मुफ्त और सीधे उपलब्ध होगा। इसका मतलब है: •	नए फोन सेटअप करते समय यूजर्स अब Truecaller इंस्टॉल करने की जरूरत महसूस नहीं करेंगे। •	Truecaller के बिजनेस मॉडल पर असर पड़ सकता है क्योंकि उसका प्रमुख फीचर टेलीकॉम कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। CNAP और Truecaller में फर्क •	CNAP: कॉल करने वाले का KYC डेटा इस्तेमाल करके नाम दिखाता है। •	Truecaller: नाम अक्सर यूजर्स द्वारा डाले जाते हैं (क्राउडसोर्स्ड)। इस वजह से CNAP द्वारा दिखाया गया नाम Truecaller की तुलना में अधिक विश्वसनीय और सही होगा। भविष्य क्या कहता है? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर Truecaller समय रहते अपने बिजनेस मॉडल को बदल ले, तो वह अभी भी यूजर्स के लिए प्रासंगिक रह सकता है। लेकिन CNAP के लागू होने के बाद आम यूजर्स के लिए Truecaller का प्रमुख उपयोग—अनजान नंबर की पहचान—कम हो जाएगा। निष्कर्ष: CNAP फीचर के आने से भारत में कॉलर आईडेंटिफिकेशन का तरीका बदल जाएगा। अब यूजर्स बिना किसी ऐप के सीधे कॉल करने वाले का नाम देख पाएंगे। इस बदलाव से Truecaller के भविष्य पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है, और ऐप को खुद को नया रूप देने की जरूरत होगी।
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Truecaller संकट में? CNAP फीचर के लागू होने से भारत में हो सकता है बड़ा बदलाव सरकारी टेक्नोलॉजी से कॉलर की पहचान अब बिना ऐप के होगी, भविष्य में Truecaller पर असरनई दिल्ली। भारत में Truecaller के करीब 25 करोड़ यूजर्स हैं, जो इसे मुख्य रूप से अनजान नंबरों की पहचान के लिए इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अब सरकार के CNAP (Calling Name Presentation) फीचर के लागू होने के बाद यह स्थिति बदल सकती है। CNAP सीधे मोबाइल नेटवर्क पर उपलब्ध होगा, जिससे यूजर्स को कॉलर का नाम जानने के लिए किसी अलग ऐप की जरूरत नहीं होगी। CNAP क्या है और कैसे काम करेगा? CNAP एक नेटवर्क-लेवल फीचर है। इसके जरिए: • आपके फोन पर आने वाले कॉल पर सिर्फ नंबर नहीं, कॉल करने वाले का नाम भी दिखेगा। • इसके लिए किसी ऐप को इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं होगी। • यूजर को अपनी प्राइवेसी परमिशन देने की आवश्यकता भी नहीं होगी। सरकार का उद्देश्य स्पैम कॉल को कम करना और यूजर्स को अधिक सुरक्षित बनाना है। Truecaller पर CNAP का असर Truecaller का मुख्य फीचर—कॉलर का नाम दिखाना—अब CNAP के जरिए मुफ्त और सीधे उपलब्ध होगा। इसका मतलब है: • नए फोन सेटअप करते समय यूजर्स अब Truecaller इंस्टॉल करने की जरूरत महसूस नहीं करेंगे। • Truecaller के बिजनेस मॉडल पर असर पड़ सकता है क्योंकि उसका प्रमुख फीचर टेलीकॉम कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। CNAP और Truecaller में फर्क • CNAP: कॉल करने वाले का KYC डेटा इस्तेमाल करके नाम दिखाता है। • Truecaller: नाम अक्सर यूजर्स द्वारा डाले जाते हैं (क्राउडसोर्स्ड)। इस वजह से CNAP द्वारा दिखाया गया नाम Truecaller की तुलना में अधिक विश्वसनीय और सही होगा। भविष्य क्या कहता है? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर Truecaller समय रहते अपने बिजनेस मॉडल को बदल ले, तो वह अभी भी यूजर्स के लिए प्रासंगिक रह सकता है। लेकिन CNAP के लागू होने के बाद आम यूजर्स के लिए Truecaller का प्रमुख उपयोग—अनजान नंबर की पहचान—कम हो जाएगा। निष्कर्ष: CNAP फीचर के आने से भारत में कॉलर आईडेंटिफिकेशन का तरीका बदल जाएगा। अब यूजर्स बिना किसी ऐप के सीधे कॉल करने वाले का नाम देख पाएंगे। इस बदलाव से Truecaller के भविष्य पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है, और ऐप को खुद को नया रूप देने की जरूरत होगी।

नई दिल्ली। भारत में Truecaller के करीब 25 करोड़ यूजर्स हैं, जो इसे मुख्य रूप से अनजान नंबरों की पहचान के लिए इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अब सरकार के CNAP (Calling Name Presentation) फीचर के लागू होने के बाद यह स्थिति बदल सकती है। CNAP सीधे मोबाइल नेटवर्क पर उपलब्ध होगा, जिससे यूजर्स को कॉलर का नाम जानने के लिए किसी अलग ऐप की जरूरत नहीं होगी। CNAP क्या है और कैसे काम करेगा? CNAP एक नेटवर्क-लेवल फीचर है। इसके जरिए: आपके फोन पर आने वाले कॉल पर सिर्फ नंबर नहीं, कॉल करने वाले का नाम भी दिखेगा। इसके लिए किसी ऐप को इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं होगी। यूजर को अपनी प्राइवेसी परमिशन देने की आवश्यकता भी नहीं होगी। सरकार का उद्देश्य स्पैम कॉल को कम करना और यूजर्स को अधिक सुरक्षित बनाना है। Truecaller पर CNAP का असर Truecaller का मुख्य फीचर—कॉलर का नाम दिखाना—अब CNAP के जरिए मुफ्त और सीधे...
2026 में AI से जुड़ी 6 डराने वाली भविष्यवाणियां, प्राइवेसी और सुरक्षा पर मंडरा सकता है खतरा ओपनएआई, गूगल जैसी कंपनियों के हालात से निकली चेतावनियां, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ सकती है टेंशन
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2026 में AI से जुड़ी 6 डराने वाली भविष्यवाणियां, प्राइवेसी और सुरक्षा पर मंडरा सकता है खतरा ओपनएआई, गूगल जैसी कंपनियों के हालात से निकली चेतावनियां, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ सकती है टेंशन

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का विकास तेजी से हो रहा है और 2026 में इसका प्रभाव और भी अधिक दिखेगा। हालांकि, हालिया रिपोर्ट में छह ऐसी भविष्यवाणियां सामने आई हैं, जो न सिर्फ हमारी प्राइवेसी बल्कि नौकरियों, निवेश और सामाजिक तंत्र पर भी असर डाल सकती हैं। अमेरिकी मैगजीन वायर्ड ने इन भविष्यवाणियों का विश्लेषण किया है। 1. AI का विकास धीमा पड़ सकता है दुनिया भर में डेटा सेंटर बनाने के खिलाफ विरोध बढ़ रहा है। अमेरिका में सोशल मीडिया पर लोग विरोध कर रहे हैं, जबकि चीन और रूस गलत जानकारी फैला सकते हैं। इससे डेटा सेंटर के निर्माण में रुकावट आएगी और AI का विकास धीमा पड़ सकता है। गलत जानकारी और फेक वीडियो अंतरराष्ट्रीय टेंशन भी बढ़ा सकते हैं। 2. घर में रोबोट्स को लाना अब भी चुनौती 2026 में टेक कॉन्फ्रेंस में AI वाले रोबोट्स चर्चा का केंद्र होंगे। गूगल जैसे ब्रांड रोबोट्स को घर के काम सिखा ...