बयान ही बने सबसे बड़े दुश्मन: 9 महीने में गई थी मुख्यमंत्री की कुर्सी, अब क्या केंद्रीय मंत्री पद पर मंडराएगा खतरा?
अपने विवादास्पद बयानों को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में आए केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे हैं कि क्या मांझी का बयानों वाला अंदाज़ एक बार फिर उन्हें भारी पड़ सकता है। इतिहास गवाह है कि वर्ष 2014 में यही बड़बोलापन उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी ले डूबा था, जब वे केवल 9 महीने में ही बिहार के मुख्यमंत्री पद से हटने को मजबूर हो गए थे।
नीतीश की पसंद, लेकिन उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे
लोकसभा चुनाव 2014 में हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 17 मई 2014 को नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद जब नए मुख्यमंत्री के नाम पर मंथन हुआ, तो कई दिग्गज नेता दौड़ में थे।
वशिष्ठ नारायण सिंह, विजय कुमार चौधरी, बिजेंद्र प्रसाद यादव, नरेंद्र नारायण यादव और यहां तक कि शरद यादव का न...









