Wednesday, May 20

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बीएलओ मौतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: चुनाव आयोग नहीं, राज्यों पर होगी जिम्मेदारी स्टाफ बढ़ाने के आदेश, बोझ से जूझ रहे कर्मियों को मिलेगी राहत

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) की मौतों और कथित आत्महत्याओं पर गहरी चिंता जताते हुए राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि चुनाव से जुड़े कार्यों में कर्मचारियों की भारी कमी और अत्यधिक काम का बोझ गंभीर मुद्दा है, लेकिन इसके लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

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राज्यों को जिम्मेदारी निभाने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनावी सूची तैयार करने और उससे जुड़े सभी कार्यों के लिए पर्याप्त जनशक्ति उपलब्ध कराना पूरी तरह राज्यों की जिम्मेदारी है। अदालत ने राज्यों से कहा कि वे चुनाव आयोग को उपलब्ध कर्मचारियों की संख्या तुरंत बढ़ाएँ ताकि मौजूदा कर्मियों पर अत्यधिक काम का दबाव कम हो सके।

सीजेआई सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा—
“अगर आप अभी 10,000 कर्मचारी दे रहे हैं, तो 20,000 या 30,000 दें। राज्य सरकारें चुनाव आयोग को पर्याप्त कार्यबल देने के लिए बाध्य हैं।”

विशेष परिस्थितियों में मिलेगी छूट
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी अधिकारी के पास ड्यूटी से छूट मांगने का उचित कारण है—जैसे गंभीर बीमारी या कोई विशेष पारिवारिक परिस्थिति—तो संबंधित अधिकारी उसकी छुट्टी पर विचार करने के लिए बाध्य होंगे।

क्यों बढ़ा चिंताओं का दौर?
पिछले कुछ समय में एसआईआर कार्यों के दौरान कई बीएलओ की मौतें और तनाव से जुड़ी घटनाएँ सामने आई हैं। इन मामलों ने चुनावी प्रक्रिया में लगे कर्मचारियों के काम के दबाव, लंबे कार्य घंटे और मानसिक स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट का संदेश स्पष्ट
राज्य सरकारें अब चुनाव से जुड़े कार्यों को ‘अतिरिक्त बोझ’ समझकर नजरअंदाज नहीं कर सकतीं। पर्याप्त स्टाफ मुहैया कराना उनकी कानूनी जिम्मेदारी है और अदालत ने इसे तुरंत सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

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