Sunday, July 19

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पापा और मैं

पापा संग हर शाम हो,
खुशियों की बरसात।
उनके संग हर पल लगे,
जैसे मीठी बात॥

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नन्ही उँगली थामकर,
चलता मेरा मान।
पापा ही मेरे लिए,
पूरे हैं भगवान॥

मासूमी की छाँव में,
सपनों का विस्तार।
हँसता बचपन बाँटता,
जग में प्रेम अपार॥

मीठी बोली, भोला मन,
आँखों में अरमान।
कल का उजला सूर्य है,
मेरा नन्हा प्राण॥

ममता, सीख, विश्वास से,
जीवन हो गुलज़ार।
संस्कारों की रोशनी,
करती बेड़ा पार।।

हँसता-गाता यह बचपन,
सबसे सुंदर राग।
नन्हे मन की हर खुशी,
जीवन का सुहाग॥

  • डॉ. सत्यवान सौरभ

(डॉ. सत्यवान सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), एक कवि और सामाजिक विचारक है।)

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