

देश के छोटे-बड़े शहरों में तेजी से बढ़ रही बाइक टैक्सी सेवाएं अब यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं। रैपिडो, उबर और ओला जैसी बाइक टैक्सी कंपनियों के कई चालक कम समय में अधिक राइड पूरी करने की होड़ में यातायात नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं।

शहरों की सड़कों पर अक्सर देखा जा रहा है कि बाइक टैक्सी चालक रेड लाइट जंप करना, तेज गति से वाहन चलाना, रश ड्राइविंग करना और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करना आम बात समझने लगे हैं। इसका सीधा खतरा पीछे बैठे यात्रियों की जान पर मंडरा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार देश में दोपहिया वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो अपने आप में चिंता का विषय है। इसके बावजूद कई बाइक टैक्सी चालक स्वयं हेलमेट नहीं पहनते और न ही यात्रियों को सुरक्षा संबंधी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। कई मामलों में यात्रियों को बिना हेलमेट के ही सफर कराया जाता है।
सवाल यह उठता है कि यात्रियों की जान को जोखिम में डालने का अधिकार आखिर इन बाइक चालकों और बाइक टैक्सी संचालित करने वाली कंपनियों को किसने दिया है? केवल अधिक कमाई और ज्यादा राइड के लिए लोगों की सुरक्षा से खिलवाड़ करना बेहद गंभीर मामला है।
सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने मांग की है कि बाइक टैक्सी कंपनियों को यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियमों का पालन करना चाहिए। यदि कंपनियां सुरक्षा मानकों की अनदेखी करती हैं, तो सरकार और न्यायालय को स्वतः संज्ञान लेते हुए कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
लोगों का कहना है कि प्रत्येक नियम उल्लंघन करने वाली कंपनी पर न्यूनतम 5 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया जाए, ताकि कंपनियां यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में बाइक टैक्सी से जुड़े हादसों में और अधिक वृद्धि हो सकती है।


