
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। 2024 के राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले समाजवादी पार्टी (सपा) के सात बागी विधायकों को लेकर ‘घर वापसी’ की चर्चाएं जोरों पर हैं। हालांकि, गौरीगंज से विधायक राकेश प्रताप सिंह और गोसाईंगंज से विधायक अभय सिंह ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है।
‘राम विरोधियों के साथ नहीं जाऊंगा’
राकेश प्रताप सिंह ने दो टूक कहा, “सपा को मुझे वापस लाने का भ्रम छोड़ देना चाहिए। मैं राम विरोधियों के साथ कभी नहीं जाऊंगा।”
वहीं अभय सिंह ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “भ्रामक खबरें फैलाने वालों पर मैं विधिक कार्रवाई करूंगा। मुझे प्रभु श्रीराम मिल गए हैं, अब माया की जरूरत नहीं है।”
क्या है ‘घर वापसी’ का फॉर्मूला?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सत्ताधारी दल में अपेक्षित महत्व न मिलने से कुछ बागी विधायक असहज हैं और सपा नेतृत्व से संपर्क साध रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, सपा ने संभावित वापसी के लिए शर्त रखी है कि आगामी राज्यसभा चुनाव में पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में मतदान कर निष्ठा साबित करनी होगी।
क्रॉस वोटिंग से बढ़ा था विवाद
राज्यसभा चुनाव में इन विधायकों ने सपा के अधिकृत उम्मीदवार आलोक रंजन के बजाय भाजपा समर्थित संजय सेठ के पक्ष में मतदान किया था। बगावत के समय राकेश प्रताप सिंह ने कहा था कि सपा नेताओं की ‘राम और राष्ट्र’ पर बयानबाजी से वे आहत थे।
इन बागी विधायकों में मनोज कुमार पांडे, राकेश पांडेय, विनोद चतुर्वेदी, पूजा पाल और आशुतोष मौर्य के नाम भी शामिल हैं।
उम्मीदवार चयन पर भी जताई थी नाराजगी
राकेश प्रताप सिंह ने राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने जया बच्चन को ‘सेलिब्रिटी’ बताते हुए कहा था कि पार्टी कार्यकर्ताओं की जगह बाहरी चेहरों को प्राथमिकता दी जा रही है। कपिल सिब्बल को लेकर भी उन्होंने असंतोष जताया था।
फिलहाल, ‘घर वापसी’ को लेकर सस्पेंस बरकरार है। बागी विधायकों के सख्त बयानों ने सियासी अटकलों को नया मोड़ दे दिया है। आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे पर और गरमाहट देखने को मिल सकती है।
