
नई दिल्ली: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को रद्द कर दिया था। इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे भारतीय मूल के पूर्व अमेरिकी एक्टिंग सॉलिसिटर जनरल नील कत्याल का हाथ है। अब कत्याल ने उन व्यवसायों और आयातकों की मदद के लिए एक नया टास्क फोर्स बनाया है जिन्हें ट्रंप के टैरिफ के कारण आर्थिक नुकसान हुआ।
नील कत्याल ने 23 फरवरी को घोषणा की कि यह कानूनी दल रिफंड की प्रक्रिया में व्यवसायों का मार्गदर्शन करेगा। उन्होंने कहा, “हम सीधे तौर पर रिफंड की मांग नहीं कर रहे थे क्योंकि हमारी कानूनी टीम को उम्मीद थी कि केस जीतने पर रिफंड अपने आप मिलेगा। अब हम पूरी ताकत से इसके लिए लड़ेंगे।”
सुप्रीम कोर्ट का फैसला:
सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप के टैरिफ को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया और टैक्स लगाने का अधिकार मुख्य रूप से कांग्रेस के पास है। इस फैसले ने वैश्विक व्यापार रणनीति को बड़ा झटका दिया और कई देशों के साथ अमेरिका के संबंधों में खटास ला दी।
टैरिफ और रिफंड का आंकड़ा:
ट्रंप ने पहले 10% और बाद में 15% ग्लोबल टैरिफ लगाया था। नील कत्याल ने अब इसकी वैधता पर सवाल उठाया है। कोर्ट के फैसले के बाद करीब तीन लाख से अधिक व्यवसायों ने 170 अरब डॉलर (लगभग 15.42 लाख करोड़ रुपये) के रिफंड की मांग की है। जस्टिस ब्रेट कवानॉघ ने कहा कि अरबों डॉलर की वापसी अमेरिकी खजाने पर बड़ा असर डालेगी।
नील कत्याल कौन हैं?
नील कत्याल का जन्म 12 मार्च 1970 को शिकागो में हुआ। उनके माता-पिता भारत से अमेरिका आए थे; माता डॉक्टर और पिता इंजीनियर हैं। कत्याल ने डार्टमाउथ कॉलेज और येल लॉ स्कूल से पढ़ाई की और सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस स्टीफन ब्रेयर के लिए क्लर्क रहे। साल 2010 में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन्हें अपना एक्टिंग सॉलिसिटर जनरल बनाया। उन्होंने अब तक अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में 50 से अधिक बड़े केस लड़े हैं, जो किसी भी अल्पसंख्यक वकील के लिए रिकॉर्ड है।
नील कत्याल का यह नया कदम न केवल अमेरिकी व्यवसायों के लिए उम्मीद की किरण है, बल्कि ट्रंप प्रशासन के लिए भी बड़ा कानूनी और आर्थिक झटका साबित हो सकता है।
