
पटना, 24 फरवरी 2026: बिहार सरकार ने राज्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब स्कूलों और धार्मिक स्थलों के पास किसी भी तरह की मांस-मछली की बिक्री प्रतिबंधित होगी। यह निर्णय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में लिया गया, जबकि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इसकी औपचारिक घोषणा की।
सार्वजनिक स्वास्थ्य और बच्चों के हित में कदम
विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य बच्चों के मानसिक विकास और सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्वच्छ परिस्थितियों में मांस-मछली की बिक्री से बीमारियों का खतरा बढ़ता है, और स्कूलों के आसपास इसका वातावरण बच्चों के कोमल मन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, जिससे हिंसक प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिल सकता है।
लाइसेंस धारकों पर भी लागू होगा नियम
सरकार ने साफ कर दिया है कि यह प्रतिबंध सभी विक्रेताओं पर लागू होगा, चाहे उनके पास वैध लाइसेंस हो या न हो। स्कूल या धार्मिक स्थलों के दायरे में स्थित दुकानों को तुरंत हटाया जाएगा। प्रशासन ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाली दुकानें सामाजिक समरसता और कानून-व्यवस्था के लिए खतरा हैं।
अवैध दुकानों के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
बिहार शहरी विकास एवं आवास विभाग ने सभी नगर निकायों को निर्देश दिए हैं कि बिना लाइसेंस वाली अवैध दुकानों को तत्काल बंद किया जाए। अधिकारियों ने पाया कि कई दुकानें बिहार नगर पालिका अधिनियम का उल्लंघन कर रही हैं, जिससे कानून-व्यवस्था और स्वच्छता दोनों प्रभावित हो रही हैं।
उपमुख्यमंत्री का बयान
उपमुख्यमंत्री सिन्हा ने कहा, “हम किसी की व्यक्तिगत भोजन की पसंद में दखल नहीं करना चाहते। लेकिन सार्वजनिक भावनाओं और सामाजिक सद्भाव का सम्मान सर्वोपरि है। हम भोजन की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं, लेकिन किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए और जन स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं होगा।”
बिहार में यह कदम शहरी स्वच्छता, बच्चों की सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। अब राज्य के स्कूल और धार्मिक स्थलों के पास मांस-मछली की खुले में बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित होगी।
