
तेहरान: फारस की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में हाल ही में तेज़ी देखी गई है। पेंटागन और अमेरिकी प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, हफ्ते के अंत तक किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन की संभावना बढ़ रही है। पिछले दिनों कई फाइटर जेट्स और एयरक्राफ्ट रिफ्यूलिंग टैंकर मिडिल ईस्ट की ओर जाते देखे गए। इसके साथ ही अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर, क्रूजर और पनडुब्बियां भी क्षेत्र में तैनात हैं, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका ईरान पर सैन्य दबाव बढ़ाने की तैयारी में है।
होर्मुज का स्ट्रेट बना केंद्र
ईरान भी दो मोर्चों पर सक्रिय है। एक ओर अमेरिका से बातचीत जारी है, वहीं दूसरी ओर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, फारस और ओमान की खाड़ी में नौसैनिक अभ्यास चल रहा है। होर्मुज मार्ग दुनिया के तेल व्यापार का अहम हिस्सा है, इसलिए यहां किसी भी गतिविधि का रणनीतिक महत्व सीमित नहीं माना जा सकता।
अमेरिकी मांगें और रणनीति
अमेरिका की मुख्य मांग है कि ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह बंद करे और यूरेनियम एनरिचमेंट को रोके। अमेरिका का तर्क है कि एनरिचमेंट जारी रहने पर ईरान न्यूक्लियर हथियार बनाने की क्षमता हासिल कर सकता है। इसके अलावा, इस्राइल के साथ मिलकर अमेरिका चाहता है कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को कमजोर किया जाए।
ईरान का रुख
ईरान का कहना है कि मिसाइल कार्यक्रम उसकी रक्षात्मक क्षमता के लिए आवश्यक है और वह हिज्बुल्लाह या हूती जैसे प्रॉक्सी समूहों को समर्थन देना जारी रखेगा। ईरान ने अमेरिका से आर्थिक प्रतिबंध हटाने की मांग भी की है।
व्यापक संघर्ष का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सैन्य टकराव का असर दूरगामी होगा। अमेरिकी हमले की स्थिति में ईरान, इस्राइल और पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकता है, जहां 30 से 40 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
ट्रंप की इच्छा और तैयारी
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि इस मामले में अंतिम निर्णय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इच्छा पर निर्भर करेगा। फिलहाल, अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सैन्य ऑपरेशन का उद्देश्य ईरानी नेतृत्व को बदलना हो, तो सफलता की कोई गारंटी नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई वैश्विक भू-राजनीतिक संतुलन, क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना और वैश्विक कूटनीति की विश्वसनीयता पर गहरा असर डाल सकती है।
