Saturday, February 21

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को रद्द किया, भारत को रणनीति रीसेट करनी पड़ सकती है

नई दिल्ली। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को गैर-कानूनी करार देते हुए उसे रद्द कर दिया है। 6-3 के बहुमत से दिए गए इस फैसले में चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने कहा कि 1977 के आपातकालीन आर्थिक कानून (IEEPA) का उपयोग एकतरफा व्यापक टैरिफ लगाने के लिए नहीं किया जा सकता। अब राष्ट्रपति अकेले टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं रखते।

This slideshow requires JavaScript.

ट्रंप प्रशासन और ‘प्लान-बी’

फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि उसने आकस्मिक योजनाएं तैयार की थीं। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यदि आपातकालीन शक्तियों का मार्ग अवरुद्ध होता है, तो प्रशासन के पास वैकल्पिक विकल्प मौजूद हैं। इनमें विशिष्ट देशों, उत्पादों या व्यापार उल्लंघनों पर लक्षित टैरिफ लगाने जैसे कानूनी उपाय शामिल हैं। हालांकि ये धीमे और प्रक्रियागत हैं, लेकिन कानूनी तौर पर मजबूत हैं।

भारत पर असर और रणनीति

हाल ही में भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते के तहत टैरिफ को 50% से घटाकर 18% किया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत को अपनी व्यापार रणनीति रीसेट करनी पड़ सकती है। यह सवाल भी उठता है कि पहले वसूले गए अतिरिक्त टैरिफ की वापसी कैसे होगी और पुरानी व्यवस्था कब और कैसे बहाल होगी।

व्यापार नीति पर दूरगामी असर

यह फैसला ट्रंप की व्यापार युद्ध रणनीति के लिए बड़ा झटका है। टैरिफ को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की उनकी नीति अब कानूनी बाधाओं का सामना करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि व्यापक आर्थिक उपायों के लिए कांग्रेस का विधायी अनुमोदन आवश्यक है। इससे अप्रत्याशित टैरिफ बदलावों से प्रभावित व्यवसायों के लिए निश्चितता बढ़ेगी, जबकि प्रशासन को वैकल्पिक कानूनी रास्ते तलाशने होंगे।

इस फैसले से वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में महत्वपूर्ण बदलाव आने की संभावना है। भारत सहित कई देशों के लिए यह एक संकेत है कि व्यापार वार्ता और रणनीतियाँ अब नई कानूनी परिस्थितियों के अनुरूप तय करनी होंगी।

Leave a Reply