
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंधों में हाल ही में नई गहराई आई है। मार्च में दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, और अप्रैल से इसके लागू होने की उम्मीद जताई जा रही है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी।
इस महीने की शुरुआत में भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण की रूपरेखा जारी की थी। इसे अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों के मुख्य वार्ताकार 23 फरवरी से वॉशिंगटन में तीन दिवसीय वार्ता करेंगे।
‘पैक्स सिलिका’ में भारत की सदस्यता
भारत ने अमेरिका के नेतृत्व वाले रणनीतिक गठबंधन ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल होकर महत्वपूर्ण खनिजों और सेमीकंडक्टर व एआई सप्लाई चेन के लिए नई संभावनाएँ खोल दी हैं। यह कदम चीन के लिए चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि गठबंधन का उद्देश्य चीन के दबदबे को कम करना और एशिया में अमेरिकी नेतृत्व को मजबूत करना है।
गोयल ने कहा, “इस गठबंधन में भारत की भागीदारी व्यापार से परे सहयोग को गहरा करने का संकेत है।”
अंतरिम व्यापार समझौते के मुख्य बिंदु
अंतरिम समझौते के तहत कई व्यापारिक वस्तुओं पर शुल्क में रियायत दी जाएगी। अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की है। इसके अलावा, रूसी कच्चे तेल की खरीद पर पहले लागू 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ भी समाप्त कर दिया गया है।
गोयल ने बताया कि समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए बड़े व्यावसायिक अवसर खोलने वाला है। विशेष रूप से परिधान, चमड़ा और समुद्री उत्पाद जैसे श्रम-गहन क्षेत्रों को इससे राहत मिलेगी। इसके साथ ही रत्न, आभूषण और मसाले जैसे क्षेत्रों को भी लाभ होगा।
विपक्ष ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अंतरिम समझौते की आलोचना करते हुए कहा कि भारत ने अमेरिका से आयात बढ़ाने पर क्यों सहमति दी। इसके जवाब में गोयल ने कहा, “अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौता हमारे निर्यातकों और उद्योगों के लिए लाभकारी है। इससे नौकरियों और व्यवसाय को सुरक्षा मिलेगी।”
रूस और चीन का नजरिया
रूस भारत के कदम को पश्चिमी और पूर्वी गुटों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश के रूप में देख सकता है। वहीं, चीन इसे भारत को अमेरिका के रणनीतिक मोहरे के रूप में देखने की संभावना रखता है। चीन इस गठबंधन को अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय दबदबे के लिए खतरा मान सकता है।
गोयल ने कहा कि अमेरिका से आयात बढ़ाने का उद्देश्य उच्च तकनीकी उत्पाद और प्रमुख कच्चे माल प्राप्त करना है। भारत के इस्पात उद्योग में अगले 5-6 वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना है, जिसके लिए कोकिंग कोल जैसी सामग्रियों की आवश्यकता होगी।
भारत और अमेरिका के बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक सहयोग से न केवल दोनों देशों को लाभ होगा, बल्कि एशिया में सामरिक संतुलन पर भी इसका असर पड़ सकता है।
