
नई दिल्ली। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एकतरफा टैरिफ को बड़े झटके के साथ गैर-कानूनी घोषित कर दिया है। 6-3 के फैसले में अदालत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देती। केवल राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान कुछ अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को विनियमित करने का अधिकार राष्ट्रपति को प्राप्त है।
इस फैसले से ट्रंप की आक्रामक व्यापार रणनीति को बड़ा झटका लगा है। IEEPA टैरिफ से प्रभावित देशों में कनाडा, चीन, मैक्सिको, भारत, ब्राजील और कई अन्य देश शामिल थे। अब अमेरिकी राष्ट्रपति अकेले टैरिफ लगाने में सक्षम नहीं हैं, अधिकार अमेरिकी कांग्रेस के पास होगा।
भारत पर असर
भारत के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला राहत की खबर है। भारतीय निर्यातकों को अब अतिरिक्त वित्तीय बोझ से छुटकारा मिल सकता है। अमेरिका के साथ हाल ही में हुए अंतरिम व्यापार समझौते के तहत टैरिफ को 25% से घटाकर 18% किया गया था। अब भारत वार्ता में और मजबूत स्थिति में रहेगा। इसके अलावा, रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी दंडात्मक कार्रवाई की शक्ति भी सीमित हो गई है।
अनिश्चितता और रिफंड
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि व्यवसायों और उपभोक्ताओं को IEEPA के तहत पहले से लगाए गए टैरिफ के लिए धनवापसी मिलेगी या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां अदालतों के माध्यम से मुआवजे की मांग कर सकती हैं, जबकि उपभोक्ताओं के लिए प्रत्यक्ष भुगतान हेतु कांग्रेस की कार्रवाई आवश्यक होगी।
ट्रंप की रणनीति और भविष्य
ट्रंप ने टैरिफ को विदेशी सरकारों पर दबाव बनाने और आर्थिक लाभ हासिल करने का एक उपकरण बताया था। उन्होंने 2,000 डॉलर के ‘टैरिफ डिविडेंड’ चेक देने का भी प्रस्ताव रखा था। अब IEEPA टैरिफ समाप्त होने से घरेलू उपभोक्ताओं पर आयात लागत में अनुमानित 600-800 डॉलर की कमी आ सकती है। हालांकि, अन्य अलग-अलग कानूनों के तहत लगाए गए टैरिफ अभी भी लागू रहेंगे।
ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि वह व्यापार विस्तार अधिनियम की धारा 232 जैसे अन्य कानूनी प्रावधानों के माध्यम से कुछ टैरिफ बनाए रखने का प्रयास कर सकता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि IEEPA टैरिफ की तरह यह उतना प्रभावशाली नहीं होगा।
इस फैसले से न केवल अमेरिका के व्यापार ढांचे में बदलाव आएगा, बल्कि भारत सहित दुनिया के कई देशों के लिए व्यापारिक अनिश्चितता भी कम होगी।
