Saturday, February 21

1981 में जमा किए 2 हजार रुपये का हिसाब मांगते वरिष्ठ पत्रकार ने आवास बोर्ड को कोसा

पटना: बिहार राज्य आवास बोर्ड (Bihar State Housing Board) के खिलाफ एक बार फिर विवाद छिड़ गया है। वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर ने अपने 1981 में जमा किए गए 2 हजार रुपये का हिसाब मांगते हुए सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने लिखा कि दशकों पहले पटना के दीघा में भूखंड देने का वादा करने के बाद आवास बोर्ड ने योजना को विफल कर दिया।

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चार दशक पुराना दर्द

सुरेंद्र किशोर ने बताया कि 15 अप्रैल 1981 को उन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में बिहार राज्य आवास बोर्ड के खाते में 2 हजार रुपये जमा किए। “पैसे नहीं थे तो कर्ज लिया था। रसीद आज भी मेरे पास है,” उन्होंने लिखा। इसके बाद आवास बोर्ड ने अग्रधन जमा करने वालों को कहा कि अपने पैसे वापस ले लें। किशोर ने कहा कि तब से अब तक 11,260 बेघर नागरिकों के साथ धोखाधड़ी करने वालों को कोई सजा नहीं मिली।

जंगलराज और भ्रष्टाचार

पत्रकार ने लिखा कि बिहार में जंगलराज के दौरान राज्य सरकार, आवास बोर्ड, पुलिस और भू-माफिया मिलकर अतिक्रमण और भ्रष्टाचार में शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने दीघा की 1024 एकड़ भूमि आवास बोर्ड की मान्यता दी थी। 2002 में पटना हाईकोर्ट ने राज्य के उच्च अधिकारियों को निर्देश दिए कि अतिक्रमण हटाएं, लेकिन विवाद इतना बढ़ गया कि मुख्य सचिव और डीजीपी के बीच मतभेद हो गया।

पटना हाईकोर्ट अब सख्त

सुरेंद्र किशोर के अनुसार, आज की सरकार पटना हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करने को तैयार दिख रही है। न्यायाधीश संदीप कुमार ने स्पष्ट किया कि अगर आवास बोर्ड के अफसर और स्थानीय थानेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई तो अदालत उन्हें नहीं छोड़ेगी। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि 1981 में अग्रधन जमा करने वालों को भूखंड दिए जाने पर बोर्ड विचार करे।

सवाल आज की सरकार से

सुरेंद्र किशोर ने लिखा कि 19 फरवरी 2026 को गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने विधान परिषद में कहा कि दीघा और राजीव नगर की 25 एकड़ जमीन डेढ़ माह में कब्जे से मुक्त कर दी जाएगी। किशोर ने सवाल उठाया कि क्या सरकार उन लोगों को भी भूखंड देगी जिन्होंने 1981 में अग्रधन जमा किया था?

पूर्व मुख्य सचिव पर बड़ा आरोप

किशोर ने कहा कि दीघा भूमि अधिग्रहण में समस्या की जड़ में एक पूर्व मुख्य सचिव का निजी स्वार्थ था। अधिग्रहीत 1024 एकड़ भूमि में उनके 4 एकड़ जमीन शामिल थे, जिसे उन्होंने अपनी प्रभावशाली ताकत से अधिग्रहण से मुक्त करवा लिया। इसके बाद आम नागरिक और किसान बुरी तरह प्रभावित हुए।

सुरेंद्र किशोर ने स्पष्ट किया कि उनके जैसे हजारों लोग इस भ्रष्ट तंत्र की वजह से नुकसान झेल चुके हैं और उन्हें अब न्याय मिलने की उम्मीद है।

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