
बांदा: उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में 34 नाबालिग बच्चों के यौन शोषण और पॉर्न वीडियो बनाने के मामले ने पूरे देश में सनसनी मचा दी थी। शुक्रवार को बांदा विशेष पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी जूनियर इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को अंतिम सांस तक फांसी की सजा सुनाई। इसके अलावा रामभवन पर 6.45 लाख और दुर्गावती पर 5.40 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
सीबीआई के मुताबिक, रामभवन ने ब्राजील, अमेरिका, चीन, अफगानिस्तान समेत लगभग 47 देशों में बच्चों के पॉर्न वीडियो बेचकर करोड़ों रुपये कमाए। इस घिनौने काम में उसकी पत्नी दुर्गावती भी पूरी तरह साथ देती रही। करीब 10 सालों तक यह सिलसिला चलता रहा, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।
इंटरपोल की सूचना पर कार्रवाई
इंटरपोल ने 17 अक्टूबर 2020 को सीबीआई को मामले की जानकारी दी और एक पेन ड्राइव भेजी जिसमें 34 बच्चों के 79 वीडियो और 679 फोटो शामिल थे। इसके आधार पर 31 अक्टूबर 2020 को नई दिल्ली में केस दर्ज किया गया। रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को क्रमशः 16 और 28 नवंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया।
कोर्ट में सुनवाई और गवाह
5 जून 2023 से बांदा विशेष पॉक्सो कोर्ट में सुनवाई हुई। कुल 74 गवाह पेश किए गए, जिनमें 25 पीड़ित बच्चे, दिल्ली एम्स के डॉक्टर और शिक्षक शामिल थे। कोर्ट ने बच्चों पर हुए अत्याचार और उनके मानसिक एवं शारीरिक कष्ट को देखते हुए इसे विरलतम अपराध माना और दोनों को फांसी की सजा सुनाई।
बच्चों का दर्द और डॉक्टरों की गवाही
कोर्ट ने कहा कि रामभवन की हैवानियत ने बच्चों को अंदर तक हिला दिया। कुछ बच्चों के नाजुक अंग क्षतिग्रस्त हुए। दिल्ली एम्स में इलाज करने वाले डॉक्टरों की टीम ने कोर्ट में गवाही दी। कोर्ट ने पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों को राज्य और केंद्र सरकार की ओर से 10-10 लाख रुपये सहायता राशि देने का आदेश भी दिया।
अपराध की जटिलता और गिरफ्तारी
रामभवन बच्चों को मोबाइल और लालच का इस्तेमाल करके फंसाता था। वह अपने सरल व्यवहार के जरिए अपनी काली करतूत छिपाता था। रामभवन मूलरूप से खरौंच के देविनका पुरवा का रहने वाला था और कई जगहों से संदिग्ध गतिविधियों की वजह से खदेड़ा गया। 17 नवंबर 2020 को सीबीआई ने उसे गिरफ्तार किया।
दस साल का अपराध और एपीस्टीन जैसी घटनाएं
रामभवन के बच्चों के यौन शोषण का मामला अमेरिकी फाइनेंसर जेफरी एपस्टीन प्रकरण की याद दिलाता है। जांच में यह भी सामने आया कि दोषी ने न केवल चित्रकूट बल्कि बांदा और हमीरपुर के बच्चों का शिकार बनाया।
