Saturday, February 21

ब्राह्मण क्यों बने सियासत का नया हॉटकेक? उत्तर प्रदेश से बिहार तक बढ़ती राजनीति की बेचैनी

पटना / लखनऊ: देश की हिंदी पट्टी की राजनीति में ब्राह्मण समुदाय एक बार फिर केंद्र में है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की ‘प्रबुद्ध’ राजनीति से लेकर बिहार विधानसभा में ‘ब्राह्मण बहस’ तक राजनीतिक हलचल बढ़ती जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ब्राह्मण वोट बैंक आजकल सत्ता की चाबी बन चुका है। यही वजह है कि दलित-पिछड़ों की राजनीति करने वाले भी अब ब्राह्मणों की ओर ध्यान देने लगे हैं।

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यूपी में ब्राह्मण वोट की अहमियत

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। यहाँ समाजवादी पार्टी के लिए ब्राह्मण वोट निर्णायक बन सकते हैं। राज्य में ब्राह्मण आबादी लगभग 11-13% है और 100 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर उनका प्रभाव निर्णायक माना जाता है। इसलिए समाजवादी पार्टी ब्राह्मणों का समर्थन पाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। अखिलेश यादव ने ‘प्रबुद्ध सम्मेलन’ और शहरों में परशुराम की मूर्तियों के जरिए यह संदेश दिया कि उनकी पार्टी अब केवल मुस्लिम-यादव गठबंधन तक सीमित नहीं है।

बिहार में ‘ब्राह्मण विवाद’

बिहार विधानसभा में हाल ही में ‘ब्राह्मणवादी मानसिकता’ को लेकर बहस छिड़ गई। पालीगंज के सीपीआईएमएल विधायक संदीप सौरभ ने अपने सवाल में इस शब्द का इस्तेमाल किया। इसके बाद स्पीकर ने ‘ब्राह्मण’ शब्द को प्रोसिडिंग से हटाने का आदेश दिया। इसके चलते सदन में विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों तरफ से हंगामा हो गया।

विपक्ष ने सफाई दी कि ‘ब्राह्मणवाद’ किसी जाति विशेष का नाम नहीं है, बल्कि यह एक मानसिकता की बात है। वहीं बीजेपी विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा कि विवाद का मुद्दा ब्राह्मणों से संबंधित नहीं, बल्कि कुछ लोगों को ब्राह्मणों से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक तकलीफ है।

ब्राह्मण वोट बैंक क्यों बना फोकस

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ब्राह्मणों को ‘साइलेंट वोटर’ और ‘ट्रेंड सेटर’ माना जाता है। यह वोट बैंक चुनावी माहौल बनाने की क्षमता रखता है और इसे नजरअंदाज करना किसी भी दल के लिए महंगा साबित हो सकता है। बिहार में ब्राह्मण आबादी लगभग 3.66% है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर उनका प्रभाव निर्णायक होता है। इसलिए क्षेत्रीय दल और बड़े राजनीतिक खिलाड़ी इस समुदाय का समर्थन पाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।

निष्कर्ष: यूपी हो या बिहार, ब्राह्मण वोट बैंक अब राजनीति का नया हॉटकेक बन चुका है। किसी भी दल की सत्ता की चाहत इस वर्ग को नजरअंदाज किए बिना पूरी नहीं हो सकती।

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