
गुवाहाटी, 21 फरवरी। असम की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब कांग्रेस छोड़ चुके वरिष्ठ नेता भूपेन बोरा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला। बोरा ने सोशल मीडिया पर दो तस्वीरें साझा करते हुए लिखा— “32 साल बनाम 32 घंटे, अंतर साफ दिख रहा है।”
भूपेन बोरा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा और भाजपा नेता बैजयंत पांडा की मौजूदगी में गृह मंत्री से मुलाकात की। माना जा रहा है कि वे 22 फरवरी को औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल होंगे।
कांग्रेस को बड़ा झटका
भूपेन बोरा 2021 से 2025 तक असम प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष रहे। कांग्रेस ने आगामी चुनावों को देखते हुए असम में अपनी रणनीति को धार देने के लिए गौरव गोगोई को जिम्मेदारी सौंपी थी। लेकिन फरवरी में बोरा के इस्तीफे ने पार्टी की चुनावी तैयारियों को झटका दिया है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कांग्रेस ने पहले ही प्रियंका गांधी, डीके शिवकुमार और मधुसूदन मिस्त्री जैसे नेताओं को असम में सक्रिय किया था, फिर भी भाजपा यह बड़ा सियासी दांव चलने में सफल रही।
‘परिवर्तन साफ दिख रहा है’
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भूपेन बोरा ने लिखा,
“32 साल बनाम 32 घंटे, अंतर साफ दिख रहा है। कल की मीटिंग के लिए गृह मंत्री अमित शाह और एक दिन पहले मेरे घर आने के लिए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा का आभारी हूं। परिवर्तन साफ दिख रहा है।”
बोरा के इस बयान को कांग्रेस के खिलाफ सीधा संदेश माना जा रहा है।
भाजपा का आक्रामक रुख
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने बोरा से मुलाकात के बाद कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वे कांग्रेस में “आखिरी हिंदू नेता” थे। इससे संकेत मिलता है कि भाजपा इस घटनाक्रम को राजनीतिक रूप से भुनाने की तैयारी में है।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी असम दौरे के दौरान कांग्रेस पर तीखे हमले कर चुके हैं।
चुनावी असर क्या होगा?
भूपेन बोरा के भाजपा में जाने से कांग्रेस को कितना नुकसान होगा, इसका आकलन चुनाव परिणामों के बाद ही संभव होगा। लेकिन इतना तय है कि चुनावी मुकाबले से पहले कांग्रेस के ‘मोमेंटम’ को झटका लगा है, जबकि भाजपा ने असम में अपनी सियासी पकड़ मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठा लिया है।
