
नई दिल्ली: युवाओं में आकर्षक और फिट बॉडी पाने की चाह ने एक गंभीर स्वास्थ्य संकट को जन्म दिया है। एनाबॉलिक स्टेरॉयड और नकली सप्लीमेंट्स की बढ़ती खुलेआम बिक्री अब संसद तक पहुंच गई है। राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने हाल ही में इस खतरनाक प्रवृत्ति और इसके घातक परिणामों का मुद्दा उठाया।
स्वाति मालीवाल ने इंस्टाग्राम पर भी चेतावनी दी कि प्रतिबंधित पदार्थ खुलेआम बिक रहे हैं और युवाओं में इनका इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि ये स्टेरॉयड लिवर, हार्ट और मेंटल हेल्थ पर गंभीर असर डालते हैं। नपुंसकता, गुस्सा, डिप्रेशन, और यहां तक कि खुदकुशी के विचार भी स्टेरॉयड के सेवन से उत्पन्न हो सकते हैं।
जानलेवा प्रभाव: हार्ट अटैक से लिवर फेलियर तक
AIIMS के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अंबुज रॉय के अनुसार, एनाबॉलिक स्टेरॉयड ब्लड प्रेशर बढ़ाते हैं, धमनियों में ब्लॉकेज बढ़ाते हैं और खून के थक्के जमाते हैं, जिससे अचानक हार्ट अटैक का खतरा रहता है। पिछले तीन महीनों में ही मेफेन्टेरमाइन के गलत इस्तेमाल से गंभीर हार्ट फेलियर के तीन मामले सामने आए हैं।
मानसिक स्वास्थ्य पर असर
AIIMS के साइकियाट्री विभाग के प्रोफेसर नंद कुमार बताते हैं कि लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने से डिप्रेशन, चिंता, चिड़चिड़ापन और सेक्स ड्राइव में कमी जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।
लिवर और किडनी को भी खतरा
सर गंगा राम अस्पताल के डॉ. पीयूष रंजन ने चेताया कि कई स्टेरॉयड और सप्लीमेंट्स में ऐसे तत्व होते हैं जिनके प्रभाव के बारे में पता नहीं होता। यह लिवर और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। दुनियाभर में 10-15% लिवर की बीमारियां दवाइयों और सप्लीमेंट्स के गलत इस्तेमाल से होती हैं।
विशेषज्ञों का सुझाव
विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय आ गया है कि सप्लीमेंट्स और स्टेरॉयड के बाजार की तुरंत जांच की जाए। केवल चेतावनी देने से काम नहीं चलेगा, वरना जिम और सोशल मीडिया के दबाव में आए युवाओं की जिंदगी खतरे में बनी रहेगी।
