Wednesday, February 18

मुजफ्फरपुर का कुख्यात साइबर अपराधी पप्पू सहनी पुलिस मुठभेड़ में घायल, इलाज के दौरान हुई मौत

मुजफ्फरपुर (बिहार): मुजफ्फरपुर के मिठनपुरा थाना क्षेत्र में मंगलवार सुबह करीब 11:30 बजे अफरातफरी मच गई, जब कुख्यात साइबर अपराधी पप्पू सहनी ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग की। इस हमले में बेला थाना के एएसआई विकास कुमार सिंह गंभीर रूप से घायल हुए। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी फायरिंग की, जिसमें पप्पू सहनी घायल हो गया। उसे एसकेएमसीएच में भर्ती कराया गया, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

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पप्पू सहनी कौन था?

पप्पू सहनी उत्तर बिहार के बड़े साइबर फ्रॉड गिरोह का सक्रिय चेहरा था। वह पूर्व राजद प्रखंड अध्यक्ष उमा शंकर सहनी का बेटा था। उसके बड़े भाई पंकज सहनी ने 2012-13 में ‘पंकज मैनेजमेंट कंपनी’ के नाम से एटीएम फ्रॉड का नेटवर्क तैयार किया, जिसमें 200 से अधिक युवक जुड़े।

पप्पू ने 2015 में एटीएम फ्रॉडिंग की ट्रेनिंग ली और गोपालगंज जिले से दो बार जेल गया। उसके खिलाफ ब्रह्मपुरा, कांटी, काजी मोहम्मदपुर, सदर, नगर, पानापुर और लहेरियासराय थानों में साइबर फ्रॉड, हथियार और चोरी के कई मामले दर्ज हैं। 2018 में ट्रक लूट कांड में भी उसका नाम सामने आया था।

साइबर ठगी का संगठित नेटवर्क

पप्पू सहनी ने अपने भाई पंकज के साथ मिलकर साइबर फ्रॉड का संगठित नेटवर्क खड़ा किया था। गिरोह में मासिक वेतन दिया जाता था और कई सदस्य एटीएम कार्ड का डुप्लीकेट बनाकर धोखाधड़ी करते थे। सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के बांध इलाके में 40 लाख रुपये की लागत से अवैध आलीशान घर में वह अपने गिरोह के साथ रहता था।

संपत्ति और हथियार

पुलिस के अनुसार दोनों भाइयों ने साइबर ठगी से अकूत संपत्ति अर्जित की। उनके आलीशान घर और महंगी गाड़ियों की जानकारी जांच में सामने आई थी। जुलाई 2020 में नगर थाना क्षेत्र में छापेमारी कर कार्बाइन, कारतूस, लैपटॉप और 23 एटीएम कार्ड बरामद किए गए थे।

परिवार का आरोप

पप्पू के पिता उमा शंकर सहनी ने मौत को हत्या बताया। उनका कहना है कि पप्पू जमानत पर बाहर था और यदि पुलिस को उसे गिरफ्तार करना था तो घर से ही किया जा सकता था।

निष्कर्ष: मुजफ्फरपुर में सक्रिय पप्पू सहनी के साइबर और हथियारबंद नेटवर्क के उजागर होने के बाद पुलिस की जांच और संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया अभी भी जारी है।

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