
नई दिल्ली: महाराष्ट्र के रत्नागिरि में देश की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनरी प्रोजेक्ट खटाई में पड़ सकता है। इस प्रोजेक्ट को 2022 में शुरू होना था, लेकिन अब तक भूमि अधिग्रहण भी नहीं हो पाया है। सूत्रों के मुताबिक, पहले ही विदेशी निवेशक इस प्रोजेक्ट से बाहर हो चुके हैं और दूसरे ने शर्तों की समीक्षा की मांग रखी है।
विदेशी निवेशकों की अनिश्चितता
रत्नागिरि रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स (RRPCL) की कल्पना अरामको, Adnoc और भारत की तीन सरकारी तेल कंपनियों – IOC, HPCL और BPCL के बीच जॉइंट वेंचर के रूप में की गई थी। इसमें अरामको और Adnoc की 50-50 फीसदी हिस्सेदारी और बाकी 50 फीसदी हिस्सेदारी भारतीय कंपनियों की थी।
हालांकि, Abu Dhabi National Oil Company (Adnoc) पहले ही इस प्रोजेक्ट से बाहर हो चुकी है। वहीं, सऊदी अरामको ने भी प्रोजेक्ट की पुरानी शर्तों की समीक्षा की मांग रखी है। अधिकारियों का कहना है कि Adnoc ने दूसरी प्राथमिकताओं के कारण प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिया।
भूमि अधिग्रहण में देरी
भूमि अधिग्रहण और स्थानीय लोगों के विरोध के कारण प्रोजेक्ट अभी तक शुरू नहीं हो सका है। इस वजह से निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ गई है और प्रोजेक्ट की समयसीमा लगातार पीछे खिसक रही है।
प्रोजेक्ट का स्केल
रत्नागिरि रिफाइनरी में 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश करके सालाना 60 मिलियन टन क्षमता वाली रिफाइनरी बनाने की योजना थी। इसके अलावा, ONGC गुजरात में 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश से 12 मिलियन टन क्षमता वाली रिफाइनरी लगाने पर विचार कर रही है। यह देश में ONGC की पहली रिफाइनरी होगी।
विश्लेषकों का कहना है कि भारत में पेट्रोकेमिकल्स की डिमांड मजबूत बनी हुई है, लेकिन इस तरह की देरी और निवेशकों की अनिश्चितता देश की ऊर्जा सुरक्षा और उद्योगिक योजनाओं को प्रभावित कर सकती है।
