
नई दिल्ली: 2026 की शुरुआत में QUAD (क्वॉड्रिलैटरल सिक्योरिटी डायलॉग) फिर से सक्रिय हो रहा है। अमेरिका चाहता है कि हिंद-प्रशांत में भारत मुख्य भूमिका निभाए, ताकि क्षेत्र में चीन के दबदबे को रोका जा सके।
क्वॉड क्यों अहम है
2025 में भारत-रूस और चीन की शंघाई सहयोग शिखर सम्मेलन में अमेरिका असहज था। तब ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका की भागीदारी वाला क्वॉड कमजोर पड़ता दिखा। अब अमेरिका भारत के साथ रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग को मजबूत कर रहा है।
अमेरिका ने हाल ही में राजदूत सर्जियो गोर और हिंद-प्रशांत कमांड के कमांडर सैमुअल जे पपारो को भारत के पश्चिमी कमांड का दौरा करवा कर भारत को अपने प्रमुख सैन्य साझेदार के रूप में शामिल करने की तैयारी की। यह कमांड पाकिस्तान की सीमा से केवल 250 किलोमीटर दूर है और रणनीतिक रूप से संवेदनशील मानी जाती है।
भारत की अहम भूमिका
भारत की भौगोलिक स्थिति और रणनीतिक स्वायत्तता क्वॉड को मजबूती देती है। लोवी इंस्टीट्यूट के अनुसार, हिंद-प्रशांत में भारत की भागीदारी अमेरिका की सुरक्षा नीति के लिए महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच हाल ही में टैरिफ में कमी और व्यापार समझौते से संबंध सुधरे हैं, जिससे रक्षा और तकनीकी सहयोग और बढ़ा।
क्वॉड से क्या हासिल होगा
इंडो-पैसिफिक में चीन के दबदबे को रोका जा सकेगा।
फ्री और ओपन इंडो-पैसिफिक सुनिश्चित होगा।
क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा कायम रहेगी।
आसियान देशों की अहमियत बढ़ेगी।
संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानूनों की रक्षा होगी।
दक्षिण चीन सागर विवादों का शांतिपूर्ण समाधान संभव होगा।
आर्थिक सहयोग और सप्लाई चेन सुरक्षित होगी।
एडवांस तकनीक, सेमीकंडक्टर्स और रेयर अर्थ मिनरल्स में मदद मिलेगी।
भारत के लिए महत्व
भारत हिंद-प्रशांत में प्रमुख भूमिका निभा सकता है।
ग्लोबल साउथ की आवाज बनकर उभर सकता है।
अपनी एक्ट ईस्ट पॉलिसी को मजबूती दे सकता है।
चीन के दबदबे को रोकने में रणनीतिक बढ़त हासिल होगी।
क्वॉड के सामने चुनौतियां
क्वॉड को अक्सर एंटी-चीन गठबंधन कहा जाता है। चीन इसे ASEAN-NATO करार देता है। चीन का कहना है कि यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है।
सदस्य देशों के अलग-अलग रणनीतिक हित हैं।
2020 गलवां घाटी संघर्ष में कोई औपचारिक कदम नहीं उठाया गया।
औपचारिक सचिवालय या फ्रेमवर्क अभी तक नहीं बना।
ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत की चीन पर आर्थिक निर्भरता अभी भी बहुत है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की सक्रिय और संतुलित भागीदारी ही हिंद-प्रशांत में QUAD की सफलता और क्षेत्रीय स्थिरता की कुंजी होगी।
