
नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस असहमति की आवाज़ को सहन नहीं कर सकती, तो यह मुख्य विपक्षी दल के लिए विनाशकारी है और ऐसी पार्टी के पास शासन करने का कोई अधिकार नहीं है।
राजीव गांधी के बयान का जिक्र
अय्यर ने कांग्रेस आलाकमान को चुनौती दी कि वह राजीव गांधी के 5 मई, 1989 के उस बयान को राहुल गांधी के मुंह से दोहरवाए, जिसमें कहा गया था कि सिर्फ धर्मनिरपेक्ष भारत ही कायम रह सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को असहमति के स्वर को सम्मान देना चाहिए, जैसा कि जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के समय होता था।
असहमति पर दिए संदेश
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, “जब इंदिरा गांधी ने असहमति के कारण पार्टी तोड़कर आपातकाल लगाया, तो परिणाम क्या निकला? कांग्रेस हार गई। उसी तरह अगर आप विरोध को दबाते हैं तो यही परिणाम होगा। असहमति लोकतंत्र की बुनियाद है। अगर इसे विनम्रता और स्पष्टता के साथ नहीं संभाल सकते, तो शासन का अधिकार नहीं है।”
कांग्रेस में असहमति का इतिहास
अय्यर ने बताया कि राजीव गांधी के समय आरिफ मोहम्मद खान, वीपी सिंह और अरुण नेहरू जैसे नेता असहमति व्यक्त करते थे और इसे पार्टी ने सम्मान दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के मौजूदा कर्ताधर्ता यह सबक भूल गए हैं।
वर्तमान तेवर और विवाद
मणिशंकर अय्यर ने हाल ही में केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की तारीफ की थी और उनके फिर से मुख्यमंत्री बनने की संभावना जताई थी। इसके बाद कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि अय्यर की टिप्पणी पार्टी की स्थिति को नहीं दर्शाती। मंगलवार को उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर 23 मिनट 10 सेकेंड का वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस में असहमति की अहमियत और उसे संभालने की ज़रूरत पर जोर दिया।
अय्यर ने अपने बयान का समापन ‘राजीव गांधी अमर रहे’ के नारे से किया।
