
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी के प्रगति मैदान में बने अत्याधुनिक भारत मंडपम ने हाल ही में AI इम्पैक्ट समिट 2026 की मेजबानी की। यह आयोजन स्थल अब दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करने वाला प्रमुख केंद्र बन गया है। कभी इस जमीन को बंजर माना जाता था, लेकिन आज यह स्थल सिडनी ओपेरा हाउस से भी ज्यादा लोगों को एक साथ बैठा सकता है।
प्रगति मैदान की ऐतिहासिक भूमि
भारत मंडपम प्रगति मैदान के 123 एकड़ क्षेत्र में स्थित है। इस भूमि पर 1959 में अंतरराष्ट्रीय कृषि मेला आयोजित हुआ था, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर और सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव भी शामिल हुए थे।
बातचीत का सार्वजनिक मंच
इस स्थल का नाम “मंडपम” पुराने मंदिरों के खंभों वाले मंडप से प्रेरित है, जहाँ सार्वजनिक समारोह और बातचीत होती थी। नाम की प्रेरणा अनुभव मंडपम से ली गई है, जो 12वीं सदी में भगवान बसवेश्वर द्वारा खुले सार्वजनिक विमर्श के लिए प्रचलित किया गया था। इसका उद्देश्य हर आयु और समुदाय के लोगों के लिए संवाद का मंच प्रदान करना है।
अद्वितीय डिज़ाइन और वास्तुकला
2016 में आयोजित डिज़ाइन प्रतियोगिता में आर्कॉप एसोसिएट्स, दिल्ली के संजय सिंह और एडास, सिंगापुर के साइमन नुनेज का डिज़ाइन विजेता रहा। उनका डिज़ाइन यमुना नदी की प्रेरणा पर आधारित था। भवन का अंडाकार आकार नदी की प्राकृतिक धारा को दर्शाता है और शंख के आकार से हिंदू परंपरा का प्रतीक भी प्रस्तुत करता है। भवन का कोई तय मुख्य प्रवेश द्वार नहीं है, जिससे यह हर दिशा से समान प्रतीत होता है और सबको साथ लेकर चलने का संदेश देता है।
सिडनी ओपेरा हाउस से बड़ा और आधुनिक सुविधाओं से लैस
भारत मंडपम के मुख्य कन्वेंशन हॉल में 7,000 लोग बैठ सकते हैं, जबकि सिडनी ओपेरा हाउस में केवल लगभग 5,500 लोग बैठ सकते हैं। इसके अलावा परिसर में:
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3,000 सीटों वाला ओपन-एयर एम्फीथिएटर
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150,000 वर्ग मीटर में फैले छह प्रदर्शनी हॉल
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390,000 वर्ग मीटर का कुल एरिया
इस स्थल का निर्माण लगभग 2,700 करोड़ रुपये (लगभग $325 मिलियन) की लागत से किया गया है।
भारत मंडपम न केवल भारत का, बल्कि वैश्विक स्तर पर संवाद और नवाचार का प्रतीक बन गया है, जो तकनीकी सम्मेलन और सांस्कृतिक आयोजनों का केंद्र बन चुका है।
