
जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर की प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। मौत के करीब 20 दिन बाद अब पुलिस ने इस प्रकरण में बड़ा कदम उठाते हुए बोरनाडा थाना क्षेत्र में आरोपी कंपाउंडर देवी सिंह के खिलाफ पहली एफआईआर दर्ज कर ली है।
एसआईटी (SIT) की जांच में सामने आया है कि कंपाउंडर ने चिकित्सा नियमों की अनदेखी करते हुए साध्वी को ऐसे इंजेक्शन लगाए, जिन्हें देने का अधिकार केवल रजिस्टर्ड डॉक्टर को होता है। इस खुलासे के बाद मामला अब पूरी तरह कंपाउंडर की भूमिका और संभावित लापरवाही के इर्द-गिर्द घूमने लगा है।
इलाज नहीं, लापरवाही बनी जानलेवा
जानकारी के अनुसार, 28 जनवरी को बोरनाडा स्थित आश्रम में साध्वी प्रेम बाईसा की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। आरोप है कि उसी समय कंपाउंडर देवी सिंह ने उन्हें डेक्सेना (Dexona) और डाइक्लोफेनिक (Diclofenac) जैसे शेड्यूल-एच श्रेणी के इंजेक्शन लगाए।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक इंजेक्शन लगने के तुरंत बाद साध्वी की हालत तेजी से बिगड़ गई और कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई।
एसआईटी द्वारा जब इस मामले में मेडिकल बोर्ड से राय मांगी गई तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। मेडिकल बोर्ड ने कहा कि अस्थमा के मरीजों के लिए ये इंजेक्शन जोखिम भरे हो सकते हैं और इनका रिएक्शन घातक साबित हो सकता है।
मेडिकल बोर्ड ने जताई गंभीर आपत्ति
विशेषज्ञों के अनुसार डेक्सेना और डाइक्लोफेनिक जैसे इंजेक्शन एक साथ देना कई मामलों में जोखिम पैदा कर सकता है। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के बाद यह आशंका और गहरी हो गई कि इंजेक्शन के गलत उपयोग ने साध्वी की जान ले ली।
कंपाउंडर की लापरवाही के कई बिंदु आए सामने
पुलिस और एसआईटी जांच में कंपाउंडर देवी सिंह की कई गंभीर गलतियां उजागर हुई हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
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डॉक्टर की सलाह के बिना शेड्यूल-एच दवाओं का उपयोग
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खुद को डॉक्टर की भूमिका में रखकर इलाज का निर्णय लेना
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रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर न होने के बावजूद इंजेक्शन लगाना
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साध्वी की मेडिकल हिस्ट्री की जानकारी होते हुए भी सावधानी न बरतना
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नर्सिंग प्रशिक्षण की सीमाओं का उल्लंघन करना
जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि समय रहते सही इलाज और विशेषज्ञ परामर्श लिया जाता, तो स्थिति टल सकती थी।
BNS की धाराओं में हो सकती है कड़ी सजा
एसआईटी ने पिछले 20 दिनों में साध्वी के पिता, आश्रम स्टाफ, रसोइए और अस्पताल कर्मियों से लंबी पूछताछ की है।
जांच में यदि यह सिद्ध हो जाता है कि मौत का कारण कंपाउंडर की घोर लापरवाही थी, तो देवी सिंह को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 या 106 के तहत सजा हो सकती है।
साजिश या लापरवाही? पुलिस कर रही गहन जांच
फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि यह मामला केवल चिकित्सकीय लापरवाही का है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश छिपी है।
साध्वी प्रेम बाईसा की मौत ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और अब लोग इस मामले में जल्द न्याय की मांग कर रहे हैं।
निष्कर्ष
यह मामला न केवल चिकित्सा नियमों की अनदेखी को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि बिना डॉक्टर की निगरानी इलाज करना कितना खतरनाक साबित हो सकता है। पुलिस और एसआईटी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस रहस्यमयी मौत से जुड़े कई और तथ्य सामने आने की संभावना है।
