Tuesday, February 17

केवल परिसर से शराब मिलने पर संपत्ति जब्त नहीं होगी: पटना हाई कोर्ट

पटना। बिहार में लागू शराबबंदी कानून के तहत संपत्ति जब्ती की कार्रवाई को लेकर पटना हाई कोर्ट ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति के परिसर या जमीन से शराब बरामद होने मात्र से उसकी संपत्ति को सील या जब्त नहीं किया जा सकता।

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हाई कोर्ट ने कहा कि जब्ती की कार्रवाई तभी वैध मानी जाएगी जब यह साबित हो कि अवैध शराब के भंडारण में परिसर के मालिक की प्रत्यक्ष संलिप्तता या मिलीभगत थी। अदालत का यह फैसला शराबबंदी कानून के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नवादा केस से जुड़ा है मामला

यह मामला नवादा उत्पाद थाना कांड संख्या 873/2024 से संबंधित है। पुलिस ने 13 दिसंबर 2024 को कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों के पास से 1.500 लीटर विदेशी शराब बरामद की थी। इसके अलावा, याचिकाकर्ता दयामंती देवी की घेराबंदी वाली खाली जमीन पर कचरे के ढेर में छिपी एक बोरी से 2.625 लीटर शराब भी मिली थी।

इसी बरामदगी के आधार पर प्रशासन ने जमीन को सील कर जब्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।

खंडपीठ ने जब्ती प्रक्रिया को किया रद्द

इस मामले की सुनवाई पटना हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह और न्यायमूर्ति आलोक कुमार पांडेय की खंडपीठ ने की।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दीपक कुमार ने अदालत को बताया कि दयामंती देवी को न तो इस मामले में अभियुक्त बनाया गया है और न ही पकड़े गए आरोपियों से उनका कोई संबंध है।

अदालत ने दलीलें स्वीकार करते हुए जमीन से संबंधित जब्ती की कार्यवाही को रद्द कर दिया और याचिकाकर्ता को बड़ी राहत प्रदान की।

हाई कोर्ट का स्पष्ट निर्देश

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा—
“अवैध शराब के भंडारण में परिसर स्वामी की प्रत्यक्ष संलिप्तता या मिलीभगत सिद्ध होना अनिवार्य है।”

अदालत ने यह भी संकेत दिया कि केवल बरामदगी के आधार पर संपत्ति जब्त कर देना कानून की मंशा के विपरीत है और इससे निर्दोष लोगों को परेशान किया जा सकता है।

पहले वाहन जब्ती पर भी आया था अहम फैसला

गौरतलब है कि इससे पहले दिसंबर 2025 में भी पटना हाई कोर्ट ने शराबबंदी कानून के तहत वाहन जब्ती को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। अदालत ने कहा था कि यदि शराब किसी व्यक्ति के हाथ में या उसके पास से मिलती है, न कि वाहन के भीतर से, तो केवल इस आधार पर वाहन को अपराध में शामिल नहीं माना जा सकता।

साथ ही यह भी कहा गया था कि वाहन मालिक को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता, जब तक यह साबित न हो जाए कि वाहन का उपयोग जानबूझकर अवैध शराब के परिवहन में किया गया।

फैसले का असर

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, हाई कोर्ट का यह निर्णय शराबबंदी कानून के तहत मनमानी जब्ती पर रोक लगाने वाला साबित हो सकता है। साथ ही इससे उन लोगों को राहत मिलेगी, जिनके खिलाफ झूठे मामलों में शराब रखकर फंसाने की घटनाएं सामने आती रही हैं।

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