
कोलकाता, 16 फरवरी 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए वाम मोर्चे में फिर से सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) की 45 सीटों की मांग के चलते फॉरवर्ड ब्लॉक ने चेतावनी दी है कि अगर उसके हिस्से की सीटें ISF को दी गईं, तो वह गठबंधन से बाहर जा सकती है।
ISF के साथ गठबंधन की तैयारी
वाम दलों के पुराने सहयोगी ISF, जिसके संस्थापक हैं फुरफुरा शरीफ के मौलवी पीरजादा अब्बास सिद्दीकी, के साथ सीटों के बंटवारे पर बातचीत चल रही है। ISF ने 45 सीटों की डिमांड की है, जिसमें कई फॉरवर्ड ब्लॉक की पारंपरिक विधानसभा सीटें शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फॉरवर्ड ब्लॉक ने इस प्रस्ताव पर ऐतराज जताते हुए गठबंधन से बाहर निकलने की चेतावनी दी है।
फुरफुरा शरीफ की राजनीतिक ताकत
कोलकाता से लगभग 40 किमी दूर हुगली जिले में स्थित फुरफुरा शरीफ लाखों बंगाली मुसलमानों का आस्था का केंद्र है। ISF बनाने के बाद भी पिछले साल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फुरफुरा शरीफ का दौरा किया। ISF का बंगाल की 2500 से अधिक मस्जिदों पर प्रभाव है और 80 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी का प्रत्यक्ष असर देखा जाता है। हालांकि पिछली बार ISF को केवल एक सीट मिली थी और वोट प्रतिशत सिर्फ 1.35 रहा था, लेकिन 2023 के पंचायत चुनाव में ISF ने मुस्लिम बहुल इलाकों में 325 ग्राम पंचायतें, 10 पंचायत समितियां और एक जिला परिषद की सीट जीतकर वापसी की थी।
वाम मोर्चे में सीटों के बंटवारे पर विवाद
2026 के विधानसभा चुनाव में ISF फिर वाम दलों से गठबंधन करने की तैयारी कर रहा है, लेकिन सीटों के बंटवारे पर बातचीत अटकी हुई है। ISF विधायक नौशाद सिद्दीकी ने CPM के नेता मोहम्मद सलीम समेत अन्य वाम नेताओं से चर्चा की। रिपोर्ट्स के अनुसार, CPM ने 294 सीटों में से 180-200 सीटों पर दावा ठोंका है, जबकि फॉरवर्ड ब्लॉक, RSP और CPI ने भी 15-20 सीटों की मांग रखी है।
इस गणना के हिसाब से ISF को 30-35 सीटें ही मिल सकती हैं, जबकि पार्टी 45 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। फॉरवर्ड ब्लॉक ने साफ कर दिया है कि अगर CPM अपने हिस्से से ISF को 30 सीटें दे सकती है तो कोई आपत्ति नहीं, लेकिन फॉरवर्ड ब्लॉक की पारंपरिक सीटों पर समझौता नहीं किया जाएगा।
बातचीत जारी, हल की उम्मीद
CPM का कहना है कि मुस्लिम और दलित वोटरों के संयोजन के लिए ISF का गठबंधन जरूरी है। पार्टी ISF को 30 सीटों पर सहमत करने की कोशिश कर रही है। सभी घटकों के बीच बातचीत जारी है और उम्मीद है कि एक सप्ताह के भीतर सभी मतभेद सुलझ जाएंगे।
