Monday, February 16

G4 देशों की बैठक में जयशंकर ने उठाया यूएनएससी सुधार का मुद्दा

नई दिल्ली/म्यूनिख: म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस, 2026 के दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जी4 देशों – जापान, जर्मनी और ब्राजील – के अपने समकक्षों के साथ डिनर डिप्लोमेसी की। यह बैठक ऐतिहासिक महत्व की थी, क्योंकि यह जी4 देशों के विदेश मंत्रियों की पहली औपचारिक बैठक रही।

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बैठक का मुख्य एजेंडा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार था। वैश्विक जियोपॉलिटिक्स में बदलाव के बीच चारों देशों ने संयुक्त राष्ट्र को विश्व शांति और सुरक्षा में एक मजबूत और सक्रिय भूमिका निभाने के लिए आवश्यक सुधारों की अहमियत पर जोर दिया।

जी4 में कौन-कौन शामिल हैं?

जी4 समूह में भारत के अलावा जापान, जर्मनी और ब्राजील शामिल हैं। इस समूह का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 21वीं सदी की वैश्विक सियासत के अनुसार परिषद को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाना है।

बैठक में क्या तय हुआ?

जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने बताया कि चारों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए अलग-अलग सरकारों और देशों के साथ समन्वय और विचार-विमर्श जारी रखने पर सहमति जताई। इस दौरान जयशंकर ने G7 देशों के अपने सहयोगियों से भी मुलाकात की और UN@80 एजेंडा के तहत भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।

विदेश मंत्री ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में जी4 बैठक में मल्टीलेटरलिज्म में सुधार और संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

UN@80 का एजेंडा क्या है?

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार UN@80 पहल की शुरुआत महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मार्च 2025 में की थी। इसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र को ज्यादा चुस्त, समग्र और तैयार बनाना है ताकि यह वैश्विक शांति और सुरक्षा बनाए रखने में सक्षम हो सके। इस पहल के तहत सुरक्षा परिषद में ढांचागत सुधार की भी आवश्यकता बताई गई है।

जी4 गठबंधन का महत्व

जी4 गठबंधन औपचारिक रूप से 2005 में अस्तित्व में आया। इसका लक्ष्य सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार लाना और नए सदस्यों को शामिल कर परिषद को 21वीं सदी की जियोपॉलिटिक्स के अनुरूप बनाना है। भारत और जापान एशिया से, ब्राजील दक्षिण अमेरिका से, और जर्मनी यूरोप से इस गठबंधन का समर्थन करते हैं।

चारों देशों ने इस बैठक में यह भी दोहराया कि वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में संयुक्त राष्ट्र का मजबूत और प्रभावी होना विश्व शांति और सुरक्षा के लिए बेहद आवश्यक है।

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