
द्वितीय विश्व युद्ध ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया और लाखों लोगों की जानें ले लीं। युद्ध की विभीषिका इतनी भयंकर थी कि इसे देखने वाले भी डर और सहम की स्थिति में आ गए। लेकिन अब सोशल मीडिया और इतिहास प्रेमियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि इस युद्ध में असली हीरो कौन था—ब्रिटेन, अमेरिका या रूस?
इतिहासकार एलन ऑलपोर्ट ने अपनी नई किताब ‘Advance Britannia: The Epic Story of the Second World War, 1942-1945’ में ब्रिटेन की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला है। यह किताब उनकी पहले की चर्चित किताब ‘Britain at Bay’ की सीक्वल है। एलन ने किताब में ब्रिटेन के संघर्ष, उसकी राजनीतिक और सैन्य रणनीतियों, और मित्र राष्ट्रों के साथ उसके रिश्तों की पड़ताल की है।
ब्रिटेन—सर्वाइवर या हीरो?
एलन ऑलपोर्ट के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटेन कोई अकेला नायक नहीं था, बल्कि यह मित्र देशों के गठबंधन का एक हिस्सा था। युद्ध में अमेरिका और सोवियत संघ की प्रमुख भूमिका रही। ब्रिटेन ने युद्ध में कई अहम गलतियां कीं, खासकर एशियाई मोर्चों पर। अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन रूजवेल्ट ने ब्रिटेन के कुछ औपनिवेशिक क्षेत्रों पर कब्जा करने की सांकेतिक धमकियां भी दी थीं।
एलन लिखते हैं कि ब्रिटेन मुख्य रूप से अपने अस्तित्व को बचाने वाला देश (Survivor) था। उसे युद्ध में बड़ी कीमत चुकानी पड़ी—देश में राशनिंग और मजदूर संकट था, राष्ट्रीय एकता कमजोर हो रही थी, अमीर और गरीब वर्गों के बीच तनाव बढ़ रहा था, और उपनिवेशों में विद्रोह और अकाल जैसी समस्याएं चल रही थीं।
चर्चिल की छवि—रणनीतिकार और साम्राज्यवादी
किताब में तत्कालीन प्रधानमंत्री विन्सटन चर्चिल का चरित्र भी सामने आता है। एलन का कहना है कि चर्चिल बेहतरीन रणनीतिकार जरूर थे, लेकिन उनके साम्राज्यवादी रुख को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। खासकर भारत की स्वतंत्रता और ब्रिटिश उपनिवेशों के मामले में उनका दृष्टिकोण विवादास्पद रहा।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट उपनिवेशवाद और औपनिवेशिक सत्ता के विरोधी थे, जबकि सोवियत संघ के नेतृत्वकर्ता स्टालिन अपने देश की सीमाओं के विस्तार में रुचि रखते थे।
युद्ध की रणनीति और मित्र देशों का गठबंधन
एलन ने किताब में El Alamein की जंग और उसके बाद उत्तरी अफ्रीका और इटली में हुए युद्धों का विश्लेषण किया है। उन्होंने बताया कि मित्र देशों के बीच रणनीतिक निर्णय हमेशा सहज नहीं थे, ब्रिटेन का ऐहतियाती रुख अमेरिका को स्वीकार्य नहीं था, और मित्र देशों को जर्मनी और पश्चिम यूरोप में किए गए ब्रिटिश हमलों से केवल मामूली फायदा हुआ।
निष्कर्ष—ब्रिटेन को हीरो मानना मिथक
एलन ऑलपोर्ट की किताब यह दर्शाती है कि ब्रिटेन ने युद्ध में जो भूमिका निभाई, वह असली हीरो के रूप में नहीं, बल्कि एक मजबूत सर्वाइवर के रूप में थी। युद्ध के बाद ब्रिटेन ने अपनी कीमत और संघर्ष को कई हद तक भूला दिया।
इस किताब के माध्यम से इतिहासकार यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि द्वितीय विश्व युद्ध में मित्र देशों का गठबंधन ही निर्णायक था और केवल ब्रिटेन को हीरो मानना इतिहास के तथ्यों के साथ मेल नहीं खाता।
